Naila Janjgir Navratri 2026: Famous Durga Pandal and Mela

नवरात्रि का त्योहार आते ही नैला जांजगीर का माहौल बदलने लगता है। जगह-जगह माता के पंडाल सजने लगते हैं। शाम होते ही सड़कों और पंडालों में रोशनी दिखाई देने लगती है। माता के दर्शन के लिए लोग परिवार और दोस्तों के साथ घर से निकलते हैं। कहीं भजन चल रहे होते हैं तो कहीं मेले की चहल-पहल देखने को मिलती है।

नैला जांजगीर नवरात्रि 2026: प्रसिद्ध दुर्गा पंडाल और मेला

एक ऐसा दुर्गा पंडाल जो पूरे छत्तीसगढ़ के साथ-साथ भारत में जिसकी भव्यता की चर्चा होती है। करोड़ों की लागत से तैयार होने वाला यह दुर्गा पंडाल हर साल बन जाता है लोगों के आकर्षण का केंद्र। आखिर कौन सा है यह दुर्गा पंडाल ? चलिए जानते हैं।

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अगर आप नवरात्रि के दिनों में नैला जांजगीर घूमने का सोच रहे हैं, तो यहां की शाम आपके लिए अच्छी याद बन सकती है। इस दौरान दुर्गा पंडाल, सजावट, बाजार और मेले का आनंद एक साथ लिया जा सकता है।

नैला जांजगीर में नवरात्रि का माहौल

नवरात्रि के समय नैला जांजगीर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है। लोग माता के दर्शन के लिए पंडालों में पहुंचते हैं। जैसे-जैसे शाम होती है, भीड़ बढ़ने लगती है। छोटे दुकानदार अपने दुकान लगाना शुरु कर देते है

पंडालों के आसपास रंग-बिरंगी लाइटें और सजावट देखने को मिलती है। कई जगहों पर माता की प्रतिमा को सुंदर तरीके से सजाया जाता है। बच्चों के लिए भी नवरात्रि का समय खास रहता है, क्योंकि मेले में उन्हें घूमने और खाने-पीने की कई चीजें मिल जाती हैं।

नैला दुर्गा पंडालों की खासियत

नैला जांजगीर की नवरात्रि में दुर्गा पंडाल लोगों के आकर्षण का बड़ा कारण रहते हैं। हर जगह पंडाल को अलग तरीके से सजाने की कोशिश की जाती है। कहीं साधारण लेकिन सुंदर सजावट दिखाई देती है तो कहीं बड़े पंडाल लोगों का ध्यान खींचते हैं।

पंडाल में पहुंचने के बाद सबसे पहले माता की प्रतिमा दिखाई देती है। इसके बाद पंडाल की सजावट और आसपास की रोशनी देखने को मिलती है। कुछ पंडालों में धार्मिक प्रसंग या अलग तरह की सजावट भी देखने को मिल सकती है।

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अगर आप कई पंडाल देखने निकलते हैं तो हर जगह का माहौल थोड़ा अलग महसूस होगा। यही चीज नवरात्रि में घूमने का मजा बढ़ा देती है।

भव्य थीम आधारित नैला जांजगीर की नवरात्रि में दुर्गा पंडाल

नैला जांजगीर में हर साल देश-विदेश के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की थीम पर विशाल पंडालों का निर्माण किया जाता है। कोलकाता और अन्य राज्यों के कुशल कारीगर 2 – 3 महीनों पहले से आकर इन आकर्षक डिज़ाइनों को आकार देते। यदि आप नैला जांजगीर की इन कलाकृतियों को करीब से देखना चाहते हैं, तो नवरात्रि के दौरान यहाँ का भ्रमण सबसे अच्छा माना जाता है

मंदिर को भव्य रूप देने के लिए तरह-तरह के आकर्षक डिजाइन और कलाकृतियां तैयार की जाती है। कारीगर अपनी बारीकी और कड़ी मेहनत से छोटे-छोटे आकारों को खूबसूरत आकृतियों में ढालते हैं।

वर्ष 2026 (नया थीम): इस बार यहाँ 150 फीट ऊंचा भव्य पंडाल बनाया गया है, जिसकी अद्भुत कलाकृति अमेरिका के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर की थीम पर आधारित है।

विशालकाय दुर्गा मूर्ति – पंडालों के अंदर में माता रानी का दिव्य प्रतिमाएँ विशालकाय और बेहद खूबसूरत 35 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित की गयी हैं।

अन्य मूर्तियाँ : मुख्य प्रतिमा के साथ ही पंडाल के अंदर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, और भगवान कार्तिकेय की भी विशाल और आकर्षक मूर्तियाँ देखने को मिल सकता हैं।

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क्या-क्या होने वाला है इनाम में ? 1 पुरुस्कार में न्यू THAR है बाकि के पुरुस्कार की जानकारी आप स्थानीय समिति के सदस्यों से पता कर सकते है

स्थानीय समिति के सदस्यों द्वारा बताया गया जानकारी :-

  • छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूरे भारत में प्रसिद्ध रहता है। इस बार का थीम क्या होने वाला है ?
  • सामने प्रवेश द्वार अमेरिका के न्यू जर्सी में अक्षरधाम मंदिर के जैसा होने वाला है।
  • अक्षरधाम मंदिर के प्रतिकृति के सामान दिखाई देगा प्रवेश द्वार
  • जी अंदर हमारी टीम शीश महल की टीम है।
  • पूर्ण स्वर्णिमाभा से राधा कृष्ण जी की झांकियां रहेंगे।
  • जी बहुत खूबसूरत पंडाल बनेगा।
  • आज तक ऐसा कहीं पंडाल नहीं देखा होगा आपने।
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नैला पंडाल के निर्माण का अनुमान

जांजगीर-चांपा के नैला में वर्ष 2026 के भव्य दुर्गा उत्सव और पंडाल के निर्माण पर करोड़ों रुपये (लगभग 1 से 2 करोड़ रुपये या उससे अधिक) की लागत का अनुमान है। यहाँ हर साल छत्तीसगढ़ के सबसे विशाल और भव्य पंडालों में से

शाम के समय बढ़ जाती है रौनक

नवरात्रि में घूमने का असली मजा शाम के समय आता है। दिन में जहां सामान्य माहौल रहता है, वहीं शाम होते ही पंडालों की लाइटें जलने लगती हैं।

परिवार के साथ लोग माता के दर्शन करने निकलते हैं। बच्चे, बड़े अपने दोस्तों की टोली के साथ पंडाल देखने जाते है। सड़कों पर लोगों की आवा गमन बढ़ जाता है और आसपास की दुकानों पर भी चहल-पहल दिखाई देने लगता है।

अगर आप पहली बार नैला जांजगीर की नवरात्रि देखने जा रहे हैं, तो शाम के समय निकलना आपके लिए अच्छा अनुभव हो सकता है।

नवरात्रि मेले में क्या मिलेगा ?

दुर्गा पंडालों के आसपास नवरात्रि के दौरान छोटी-बड़ी दुकानें भी लगती हैं। यहां बच्चों के लिए खिलौने, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा की छोटी-छोटी वस्तुएं मिल जाती हैं।

मेले में बच्चों को झूले झुलना काफी पसंद आते हैं। परिवार के साथ घूमते समय लोग चाट, गुपचुप, पकौड़े और दूसरी चीजों का स्वाद भी लेते हैं।

मेले में जाने का अपना अलग मजा है। एक तरफ माता के दर्शन होते हैं और दूसरी तरफ परिवार के साथ कुछ समय घूमने का मौका भी मिल जाता है।

परिवार और दोस्तों के साथ घूमने की जगह

नवरात्रि केवल पूजा का त्योहार नहीं है, बल्कि लोगों के मिलने-जुलने का समय भी है। इस दौरान परिवार के लोग साथ निकलते हैं और पंडालों में माता के दर्शन करते हैं।

दोस्तों के साथ भी शाम को कई पंडाल घूमे जा सकते हैं। अगर आपको फोटो खींचने का शौक है तो सजाए गए पंडाल और रोशनी अच्छी तस्वीरों के लिए भी मौके देते हैं। हालांकि भीड़ के समय दूसरों की परेशानी का ध्यान रखना जरूरी है।

नैला जांजगीर नवरात्रि में कब जाएं ?

अगर आप पंडाल और सजावट देखना चाहते हैं तो शाम से रात का समय अच्छा रहता है। इस समय पंडालों की लाइटिंग भी दिखाई देती है और मेले की रौनक भी बढ़ जाती है।

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बहुत ज्यादा भीड़ से बचना चाहते हैं तो अपने हिसाब से थोड़ा जल्दी निकल सकते हैं। खास दिनों में भीड़ ज्यादा हो सकती है, इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के साथ जाते समय थोड़ा ध्यान रखना चाहिए।

नैला जांजगीर की नवरात्रि में घूमते समय इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्रि के समय पंडालों में भीड़ रहती है।

इसलिए अपने सामान, मोबाइल, पैसे और यदि आप सोने चाँदी के आभूषण पहने है तो भीड़ से गुजरते हुए विशेष ध्यान रखें।

बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें।

अगर आप बाइक या कार से जा रहे हैं तो वाहन ऐसी जगह खड़ा करें जहां आने-जाने वाले लोगों को परेशानी न हो।

पंडाल में दर्शन करते समय व्यवस्था बनाए रखें और आयोजकों की बात मानें।

कैसे पहुंचे नैला जांजगीर-चांपा

नैला (जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़) के प्रसिद्ध दुर्गा पंडाल पहुंचने के लिए आप ट्रेन, बस या निजी वाहन का उपयोग कर सकते हैं। यह पंडाल नैला रेलवे स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर अग्रसेन भवन के पास स्थित है।

• ट्रेन द्वारा: आप नैला रेलवे स्टेशन उतर सकते हैं। स्टेशन से पंडाल की दूरी सिर्फ 1 किलोमीटर है, जहाँ से आप पैदल या ऑटो लेकर आसानी से पहुँच सकते हैं।

• सड़क मार्ग (बस या कार द्वारा):

• बिलासपुर से: नैला की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है।

• रायपुर से: नैला की दूरी लगभग 170 किलोमीटर है।

• शिवरीनारायण से: नैला की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है।

कोरबा से: नैला की दूरी लगभग 55 किलोमीटर है।

स्थानीय स्तर पर जांजगीर-नैला पहुंचने के बाद परशुराम चौक के रास्ते अग्रसेन भवन के पास बने इस भव्य पंडाल तक पहुँचा जा सकता है।

निष्कर्ष

नैला जांजगीर की नवरात्रि में भक्ति के साथ उत्सव का माहौल भी देखने को मिलता है।

सुंदर दुर्गा पंडाल, रोशनी, मेला और शाम की चहल-पहल इस त्योहार को खास बनाते हैं।

अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ नवरात्रि में कुछ समय बाहर बिताना चाहते हैं

तो नैला जांजगीर के पंडाल और मेले को अपनी घूमने की सूची में रख सकते हैं।

माता के दर्शन के साथ यहां की रौनक देखना एक अच्छा अनुभव हो सकता है