छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित Pithampur Shiv Mandir (पिथमपुर शिव मंदिर) एक ऐसा प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। यह मंदिर अपनी धार्मिक आस्था, शांत वातावरण और स्थानीय मान्यताओं के कारण पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
यदि आप छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शिव मंदिरों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पिथमपुर शिव मंदिर आपकी सूची में अवश्य होना चाहिए। यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा-अर्चना ही नहीं करते, बल्कि मंदिर के शांत वातावरण में आध्यात्मिक शांति का भी अनुभव करते हैं।
मंदिर के चारों ओर का प्राकृतिक वातावरण इसे और भी आकर्षक बनाता है। सुबह और शाम के समय यहाँ होने वाली आरती का दृश्य भक्तों के मन में गहरी श्रद्धा का भाव उत्पन्न करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने पर मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
यही कारण है कि जांजगीर-चांपा के अलावा रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
पिथमपुर शिव मंदिर का इतिहास
पिथमपुर शिव मंदिर का इतिहास कई वर्षों पुराना माना जाता है। यद्यपि इसके निर्माण काल के बारे में स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, फिर भी स्थानीय परंपराओं और जनश्रुतियों के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है।
समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिससे इसकी धार्मिक पहचान और मजबूत हुई। आज भी मंदिर में प्राचीनता और आधुनिक व्यवस्थाओं का सुंदर संतुलन देखने को मिलता है।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार पहले यहाँ केवल आसपास के गाँवों के लोग पूजा करने आते थे, लेकिन समय के साथ इसकी प्रसिद्धि बढ़ती गई। आज यह मंदिर पूरे छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव धामों में गिना जाता है।
महाशिवरात्रि और सावन के दौरान मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इन अवसरों पर भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ते हैं।
पिथमपुर शिव मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताएँ
हर प्राचीन शिव मंदिर की तरह पिथमपुर शिव मंदिर से भी कई धार्मिक मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं। स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित कथाओं के अनुसार भगवान शिव की विशेष कृपा इस स्थान पर सदैव बनी रहती है।
मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ यहाँ जलाभिषेक करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और मन को शांति मिलती है। यही विश्वास हर वर्ष हजारों भक्तों को इस मंदिर तक खींच लाता है।
सावन के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन दूर-दूर से श्रद्धालु जल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री लेकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठता है।
हालाँकि मंदिर से जुड़ी कई लोककथाएँ प्रचलित हैं, लेकिन ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्यों और स्थानीय मान्यताओं के बीच अंतर समझना भी आवश्यक है। इसलिए किसी भी कथा को अंतिम ऐतिहासिक सत्य मानने के बजाय स्थानीय परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आज भी यह मंदिर लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक है। यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के साथ आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है।
वास्तुकला, प्रसिद्धि और प्रमुख पर्व
पिथमपुर शिव मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएँ
पिथमपुर शिव मंदिर की वास्तुकला इसकी धार्मिक गरिमा को और भी आकर्षक बनाती है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह भगवान शिव को समर्पित है, जहाँ श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा के साथ जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर परिसर साफ-सुथरा और व्यवस्थित है, जिससे दर्शन करने आने वाले भक्तों को सुविधाजनक वातावरण मिलता है। सुबह और शाम की आरती के समय मंदिर का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो जाता है।
मंदिर में प्रवेश करते ही घंटियों की मधुर ध्वनि, धूप और अगरबत्ती की सुगंध तथा भक्तों की शिव भक्ति एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। यही वातावरण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को बार-बार आकर्षित करता है।
पिथमपुर शिव मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
पिथमपुर शिव मंदिर की प्रसिद्धि का सबसे बड़ा कारण यहाँ की गहरी धार्मिक आस्था है। वर्षों से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएँ लेकर इस मंदिर में आते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और श्रावण मास के दौरान यहाँ विशेष भीड़ देखने को मिलती है। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर भी मंदिर पहुँचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर की शांत प्राकृतिक स्थिति, धार्मिक वातावरण और स्थानीय लोगों की आस्था इसे जांजगीर-चांपा जिले के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल करती है। यदि आप धार्मिक पर्यटन के साथ मानसिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह स्थान एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
पिथमपुर मेला महाशिवरात्रि, सावन और अन्य प्रमुख पर्व
पिथमपुर शिव मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ विशेष उत्साह देखने को मिलता है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण का आयोजन होता है। हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
सावन के प्रत्येक सोमवार को भी मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त जलाभिषेक करने पहुँचते हैं। कई श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
इन धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यदि आप पिथमपुर शिव मंदिर की जीवंत धार्मिक परंपरा को करीब से देखना चाहते हैं, तो सावन या महाशिवरात्रि के समय यात्रा करना एक यादगार अनुभव हो सकता है।
पिथमपुर शिव मंदिर दर्शन समय, प्रवेश शुल्क और पूजा व्यवस्था
पिथमपुर शिव मंदिर में श्रद्धालु पूरे वर्ष भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के हसदेव नदी तट पर स्थित प्रसिद्ध पीथमपुर शिव मंदिर (कलेश्वरनाथ मंदिर) में दर्शन
मंदिर विवरण सारणी
| विवरण श्रेणी | जानकारी / समय | शुल्क | विशेष व्यवस्था |
|---|---|---|---|
| दर्शन समय | प्रतिदिन 24 घंटे खुला (सामान्यतः सुबह 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक उत्तम समय) | निःशुल्क | कोई टिकट या पास नहीं |
| विशेष आरती | प्रत्येक सोमवार (संध्याकालीन महाआरती) | निःशुल्क | सोमवार को विशेष भीड़ व सत्संग |
| पूजा व्यवस्था | जलाभिषेक, बेलपत्र व दुग्धाभिषेक | निःशुल्क | स्वयं जल अर्पण या पुजारी द्वारा अनुष्ठान |
| विशेष आयोजन | श्रावण मास विशेष पालकी यात्रा एवं भजन | निःशुल्क | शाम 4:30 बजे से भजन-कीर्तन |
सामान्य दिनों में मंदिर सुबह से शाम तक खुला रहता है, जबकि सावन और महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर दर्शन का समय बढ़ाया जा सकता है। यात्रा से पहले स्थानीय मंदिर समिति या प्रशासन से समय की पुष्टि करना बेहतर रहता है।
प्रवेश शुल्क – मंदिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
पूजा व्यवस्था – श्रद्धालु अपनी इच्छा और श्रद्धा के अनुसार पूजा सामग्री चढ़ा सकते हैं। मंदिर परिसर के बाहर फूल, बेलपत्र, धतूरा, नारियल और अन्य पूजन सामग्री की दुकानें भी उपलब्ध रहती हैं।
यदि आप अभिषेक या विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो मंदिर के पुजारियों से पहले जानकारी लेना उचित रहेगा। त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण दर्शन में कुछ समय लग सकता है
पिथमपुर शिव मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय
वैसे तो मंदिर पूरे वर्ष दर्शन के लिए खुला रहता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सबसे आरामदायक माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और मंदिर परिसर में आराम से दर्शन किए जा सकते हैं।
यदि आप धार्मिक उत्सवों का अनुभव करना चाहते हैं, तो महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यात्रा कर सकते हैं। इन अवसरों पर मंदिर का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो जाता है। हालांकि, भीड़ अधिक होने के कारण समय का विशेष ध्यान रखें।
गर्मी के मौसम में दोपहर के समय तापमान अधिक हो सकता है, इसलिए सुबह या शाम के समय दर्शन करना अधिक सुविधाजनक रहता है।
पिथमपुर शिव मंदिर कैसे पहुँचें?
जांजगीर-चांपा जिले में स्थित पिथमपुर शिव मंदिर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से यहाँ पहुँचना आसान है।
सड़क मार्ग
यदि आप रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ या जांजगीर शहर से यात्रा कर रहे हैं, तो निजी वाहन, टैक्सी या नियमित बस सेवाओं के माध्यम से मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। सड़कें अच्छी स्थिति में होने के कारण यात्रा आरामदायक रहती है।
Google Maps की सहायता से भी मंदिर का मार्ग आसानी से खोजा जा सकता है। यदि आप पहली बार आ रहे हैं, तो स्थानीय लोगों से रास्ते की जानकारी लेना भी उपयोगी रहेगा।
रेल मार्ग
पिथमपुर शिव मंदिर के लिए सबसे निकट का प्रमुख रेलवे स्टेशन जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, नागपुर, हावड़ा और अन्य प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
स्टेशन से मंदिर तक ऑटो, टैक्सी या स्थानीय वाहनों की सुविधा मिल जाती है।
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर है। रायपुर से सड़क मार्ग द्वारा टैक्सी या बस के माध्यम से जांजगीर-चांपा होते हुए पिथमपुर शिव मंदिर पहुँचा जा सकता है।
पिथमपुर शिव मंदिर के आसपास घूमने की प्रमुख जगहें
यदि आप पिथमपुर शिव मंदिर की यात्रा पर जा रहे हैं, तो आसपास स्थित कुछ अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
- चंद्रहासिनी देवी मंदिर
महानदी के तट पर स्थित यह शक्तिपीठ छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में से एक है। नवरात्रि के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
- शिवरीनारायण
शिवरीनारायण धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान नारायण का प्राचीन मंदिर और त्रिवेणी संगम इसे विशेष बनाते हैं।
- खरौद का लक्ष्मणेश्वर मंदिर
यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है। इतिहास और धार्मिक पर्यटन में रुचि रखने वालों के लिए यह एक अच्छा स्थान है।
- जांजगीर का विष्णु मंदिर
जांजगीर शहर का यह प्राचीन मंदिर अपनी कलात्मक नक्काशी और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यदि समय हो तो यहाँ भी अवश्य जाएँ।
यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
- मंदिर परिसर की स्वच्छता बनाए रखें।
- पूजा के दौरान मंदिर के नियमों का पालन करें।
- भीड़ वाले दिनों में अपने सामान का ध्यान रखें।
- गर्मियों में पानी की बोतल साथ रखें।
- स्थानीय लोगों और मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- धार्मिक स्थल होने के कारण शालीन व आरामदायक वस्त्र पहनें।
इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आपकी पिथमपुर शिव मंदिर यात्रा अधिक सुखद, सुरक्षित और यादगार बन सकती है।
पिथमपुर यात्रा के लिए उपयोगी सुझाव
यदि आप पहली बार पिथमपुर शिव मंदिर की यात्रा करने जा रहे हैं, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर अपनी यात्रा को अधिक आरामदायक और यादगार बना सकते हैं।
सुबह के समय दर्शन करने पर भीड़ अपेक्षाकृत कम रहती है और शांत वातावरण में भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। यदि आपकी यात्रा सावन या महाशिवरात्रि के दौरान है, तो समय से पहले पहुँचने का प्रयास करें, क्योंकि इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहती है।
यदि आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो बुजुर्गों और बच्चों की सुविधा का विशेष ध्यान रखें।
गर्मी के मौसम में पानी की बोतल, टोपी और हल्के कपड़े साथ रखें।
वहीं बरसात के मौसम में छाता या रेनकोट साथ रखना उपयोगी रहेगा।
मंदिर परिसर में साफ-सफाई बनाए रखें और प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फेंकें। धार्मिक स्थल होने के कारण शांत वातावरण बनाए रखना और मंदिर प्रशासन द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना प्रत्येक श्रद्धालु की जिम्मेदारी है।
यदि आप फोटोग्राफी करना चाहते हैं, तो पहले यह सुनिश्चित कर लें कि मंदिर परिसर के किस हिस्से में इसकी अनुमति है। गर्भगृह में फोटो या वीडियो बनाने से पहले पुजारी या मंदिर समिति से अनुमति अवश्य लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. पिथमपुर शिव मंदिर कहाँ स्थित है?
पिथमपुर शिव मंदिर छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के पिथमपुर गाँव में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।
2. पिथमपुर शिव मंदिर किस देवता को समर्पित है?
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और क्षेत्र के प्रमुख शिव मंदिरों में गिना जाता है।
3. क्या पिथमपुर शिव मंदिर में प्रवेश शुल्क लगता है?
नहीं, सामान्य दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
4. पिथमपुर शिव मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
अक्टूबर से मार्च तक का मौसम यात्रा के लिए सबसे आरामदायक माना जाता है। यदि आप धार्मिक उत्सवों का अनुभव करना चाहते हैं, तो सावन या महाशिवरात्रि के दौरान भी जा सकते हैं।
5. निकटतम रेलवे स्टेशन कौन-सा है?
जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन पिथमपुर शिव मंदिर का सबसे निकट का प्रमुख रेलवे स्टेशन है।
6. क्या मंदिर तक सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है?
हाँ, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और जांजगीर सहित छत्तीसगढ़ के कई शहरों से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
7. क्या मंदिर में महाशिवरात्रि का विशेष आयोजन होता है?
हाँ, महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
8. क्या परिवार के साथ पिथमपुर शिव मंदिर घूमने जाना उचित है?
बिल्कुल। यह मंदिर परिवार, बुजुर्गों और बच्चों के साथ धार्मिक यात्रा के लिए एक शांत और सुरक्षित स्थान माना जाता है।
9. मंदिर के आसपास कौन-कौन से पर्यटन स्थल हैं?
पिथमपुर शिव मंदिर के आसपास चंद्रहासिनी देवी मंदिर, शिवरीनारायण, खरौद का लक्ष्मणेश्वर मंदिर, नहरिया बाबा मंदिर (जांजगीर),देवरी पिकनिक स्पॉट, मदनपुरगढ़ मंदिर और जांजगीर का विष्णु मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल स्थित हैं।
10. क्या सावन में कांवड़ यात्रा होती है?
सावन के महीने में बड़ी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुँचते हैं। स्थानीय स्तर पर धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।
11. पीथमपुर मेला छत्तीसगढ़ में कब आयोजित होता है?
गवान शिव मंदिर हसदेव नदी के तट पर स्थित है जो कि कलेश्वरनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। महाशिवरात्रि एवं रंग पंचमी त्यौहार के समय 10 दिन का मेला आयोजित किया जाता है।
12. क्या छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ में कोई ज्योतिर्लिंग है?
छत्तीसगढ़ में इसे “ द्वादस ज्योतिर्लिंग ” की तरह “अर्धनारीश्वर शिवलिंग” के नाम से जाना जाता है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि शिवलिंग का आकार हर साल लगातार बढ़ रहा है।
13. छत्तीसगढ़ में कौन सा प्रसिद्ध शिव मंदिर है?
छत्तीसगढ़ में कई प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, जिनमें भोरमदेव मंदिर, भड़मदेव मंदिर, भूतेश्वरनाथ महादेव और देवबलोदा शिव मंदिर प्रमुख हैं। ये सभी स्थान अपनी अनूठी वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं
निष्कर्ष
पिथमपुर शिव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जांजगीर-चांपा जिले की आस्था, संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहाँ का शांत वातावरण, भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और प्रमुख धार्मिक आयोजनों की भव्यता
हर वर्ष हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
यदि आप छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शिव मंदिरों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पिथमपुर शिव मंदिर को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें। यहाँ की आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्व आपकी यात्रा को यादगार बना देंगे।
मेरी यात्रा का अनुभव
पिछले साल मुझे महाशिवरात्रि के अवसर पर पिथमपुर शिव मंदिर जाने का अवसर मिला। मैं चांपा रेलवे स्टेशन पहुँचा, जहाँ से हम शेयर ऑटो के माध्यम से मंदिर पहुँचे। रास्ते में गाँवों का शांत वातावरण और हरियाली यात्रा को और भी आनंददायक बना रहे थे।
मंदिर पहुँचते ही चारों ओर “हर-हर महादेव” के जयघोष और भक्तों की भीड़ देखने को मिली। सबसे पहले हमने भगवान शिव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। दर्शन के बाद हमने मंदिर परिसर में अपनी इस यादगार यात्रा की ग्रुप फोटो भी खिंचवाई।
महाशिवरात्रि होने के कारण मंदिर परिसर के आसपास भव्य मेला लगा हुआ था। मेले में कई नागा साधुओं के दर्शन करने का अवसर मिला। उन्हें करीब से देखना मेरे लिए एक अलग और यादगार अनुभव था। दूर-दूर से आए श्रद्धालु उनकी झलक पाने और आशीर्वाद लेने के लिए उत्साहित दिखाई दे रहे थे।
मेले में बच्चों और परिवारों के लिए कई तरह के झूले, स्थानीय दुकानों की रौनक, खाने-पीने के स्टॉल और अन्य मनोरंजन गतिविधियाँ भी थीं। पूरे मेले का वातावरण भक्ति और उत्साह से भरा हुआ था। हर तरफ लोगों के चेहरों पर खुशी और श्रद्धा साफ दिखाई दे रही थी।
दर्शन और मेला घूमने के बाद हम मंदिर के पास बहने वाली नदी के किनारे कुछ समय के लिए रुके। वहाँ की ठंडी हवा और शांत वातावरण ने पूरे दिन की थकान दूर कर दी। प्रकृति के बीच बिताए गए वे कुछ पल मेरी इस यात्रा की सबसे खूबसूरत यादों में शामिल हैं।
मेरे लिए पिथमपुर शिव मंदिर की यह यात्रा केवल भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि महाशिवरात्रि के मेले, नागा साधुओं के दर्शन और प्रकृति के बीच बिताए गए शांत पलों ने इसे जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बना दिया।