Chaiturgarh Fort, Korba: Exploring Chhattisgarh’s Hidden Historical & Spiritual Gem

भारत में किलों की कोई कमी नहीं है। राजस्थान से लेकर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र तक अनेक किले ऐसे हैं जिनके बारे में लोग जानते हैं। लेकिन कुछ किले ऐसे भी हैं जो लोकप्रियता की भीड़ से दूर होने के बावजूद अपने भीतर असाधारण इतिहास और रहस्य समेटे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित चैतुरगढ़ किला भी उन्हीं में से एक है।

जब कोई पहली बार चैतुरगढ़ का नाम सुनता है तो उसके मन में शायद किसी साधारण पहाड़ी किले की तस्वीर बनती है। लेकिन जैसे ही आप इस स्थान के बारे में गहराई से जानना शुरू करते हैं वैसे वैसे महसूस होता है कि यह केवल एक Fort नहीं बल्कि इतिहास आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है।

कल्पना कीजिए कि आप सुबह के समय पहाड़ों के बीच बने रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। नीचे दूर तक फैले जंगल दिखाई दे रहे हैं। ठंडी हवा चेहरे को छू रही है। ऊंचाई बढ़ने के साथ साथ आसपास का दृश्य और अधिक विशाल होता जा रहा है। अचानक सामने प्राचीन पत्थरों से बना एक विशाल किला दिखाई देता है जिसने सदियों से समय की हर चुनौती का सामना किया है।

ऐसे क्षणों में अक्सर व्यक्ति को लगता है कि वह वर्तमान में नहीं बल्कि किसी पुराने युग में पहुंच गया है। यही अनुभव चैतुरगढ़ किले की सबसे बड़ी विशेषता है।

चैतुरगढ़ को अक्सर छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और सुरक्षित किलों में से एक माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 3000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह किला प्राकृतिक सुरक्षा से घिरा हुआ है। यही कारण है कि प्राचीन समय में इसका सामरिक महत्व बहुत अधिक रहा होगा।

लेकिन चैतुरगढ़ की पहचान केवल उसके सैन्य महत्व तक सीमित नहीं है। यहां स्थित मां महिषासुरमर्दिनी का प्रसिद्ध मंदिर इस स्थान को धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यही वजह है कि यहां इतिहास प्रेमियों के साथ साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचते हैं।

मुझे हमेशा ऐसे स्थान आकर्षित करते हैं जहां केवल एक कहानी नहीं बल्कि कई कहानियां एक साथ मौजूद हों। चैतुरगढ़ भी ऐसा ही स्थान है। यहां किले की कहानी है। यहां देवी मंदिर की कहानी है। यहां पहाड़ों और जंगलों की कहानी है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां समय की कहानी है।

आज के समय में जब अधिकतर लोग प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक ही सीमित रहते हैं तब चैतुरगढ़ जैसे स्थान यात्रियों को कुछ अलग अनुभव प्रदान करते हैं। यहां पहुंचने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है लेकिन शायद यही मेहनत इस यात्रा को और अधिक यादगार बना देती है।

जब आप किसी पहाड़ी किले तक स्वयं पहुंचते हैं तो उसका महत्व केवल देखने भर का नहीं रह जाता बल्कि वह आपके अनुभव का हिस्सा बन जाता है। चैतुरगढ़ भी ऐसा ही अनुभव प्रदान करता है।

अगर आप इतिहास प्रेमी हैं तो यहां आपको प्राचीन दुर्ग की झलक मिलेगी। अगर आप धार्मिक व्यक्ति हैं तो आपको मां महिषासुरमर्दिनी के दर्शन प्राप्त होंगे। अगर आपको प्रकृति पसंद है तो यहां का वातावरण आपको प्रभावित करेगा। और अगर आपको रोमांच पसंद है तो यह यात्रा आपके लिए विशेष बन सकती है।

यही कारण है कि चैतुरगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

चैतुरगढ़ किले का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व क्या है

किसी भी किले की सबसे बड़ी पहचान उसका इतिहास होता है और चैतुरगढ़ का इतिहास काफी रोचक माना जाता है।

इतिहासकारों के अनुसार यह किला प्राचीन काल में महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र रहा होगा। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति थी। ऊंचे पहाड़ पर स्थित होने के कारण यहां से दूर तक निगरानी की जा सकती थी।

युद्ध के समय किसी भी शत्रु सेना के लिए इस किले तक पहुंचना आसान नहीं रहा होगा। यही कारण है कि इसे प्राकृतिक रूप से सुरक्षित दुर्ग माना जाता है।

चैतुरगढ़ का संबंध कलचुरी शासकों से भी जोड़ा जाता है। माना जाता है कि इस क्षेत्र में उनके शासनकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य हुए थे। हालांकि समय के साथ किले के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए लेकिन आज भी इसके अवशेष इसके गौरवशाली अतीत की कहानी सुनाते हैं।

धार्मिक दृष्टि से चैतुरगढ़ का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि यहां प्रसिद्ध मां महिषासुरमर्दिनी मंदिर स्थित है। स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर की अत्यधिक मान्यता है।

नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उस समय पूरा क्षेत्र धार्मिक वातावरण से भर जाता है।

मंदिर और किले का यह अद्भुत मेल चैतुरगढ़ को अन्य किलों से अलग बनाता है। अधिकांश किलों में केवल इतिहास मिलता है लेकिन यहां इतिहास के साथ आस्था भी मौजूद है।

स्थानीय लोगों के बीच इस स्थान को लेकर अनेक कथाएं और मान्यताएं भी प्रचलित हैं। यही लोककथाएं इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाती हैं।

जब कोई व्यक्ति यहां पहुंचता है तो उसे केवल पत्थरों की संरचना नहीं दिखाई देती बल्कि सदियों से चली आ रही आस्था और परंपराओं का भी अनुभव होता है।

Chaiturgarh Fort तक कैसे पहुंचें यात्रा की तैयारी कैसे करें

चैतुरगढ़ किला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए सबसे पहले कोरबा या आसपास के प्रमुख शहर तक पहुंचना होता है।

अगर आप हवाई मार्ग से यात्रा कर रहे हैं तो रायपुर निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा माना जाता है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा कोरबा और फिर चैतुरगढ़ क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए कोरबा एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहां से आगे सड़क मार्ग द्वारा यात्रा करनी होती है।

किले तक पहुंचने के अंतिम चरण में पहाड़ी मार्ग का सामना करना पड़ता है। यही हिस्सा यात्रा को रोमांचक बनाता है।

यात्रा की तैयारी कैसे करें

यात्रा के दौरान मजबूत और आरामदायक जूते पहनना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि कई स्थानों पर पैदल चलना पड़ सकता है।

गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी साथ रखना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यात्रा के दौरान ऊर्जा बनाए रखना भी जरूरी होता है।

अगर आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं तो कैमरा अवश्य साथ रखें क्योंकि यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य बेहद आकर्षक होते हैं।

इतिहास प्रेमियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले किले के इतिहास के बारे में थोड़ा अध्ययन कर लें। ऐसा करने पर स्थल को समझना और अधिक रोचक हो जाता है।

चैतुरगढ़ किला घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है

किसी भी पहाड़ी किले का वास्तविक सौंदर्य सही मौसम में ही पूरी तरह दिखाई देता है। चैतुरगढ़ भी ऐसा ही स्थान है जहां मौसम आपकी पूरी यात्रा के अनुभव को प्रभावित कर सकता है। अगर आप इस किले को आराम से देखना चाहते हैं और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेना चाहते हैं तो अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।

सर्दियों के दौरान यहां का मौसम सुहावना रहता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण सुबह और शाम हल्की ठंड महसूस होती है। इसी समय किले की चढ़ाई भी अपेक्षाकृत आसान लगती है और लंबे समय तक घूमना संभव हो पाता है।

मानसून के बाद का समय भी अत्यंत सुंदर माना जाता है। चारों ओर हरियाली फैल जाती है। जंगल और पहाड़ नए जीवन से भर जाते हैं। दूर तक फैले बादल और पहाड़ियों का दृश्य किसी चित्र की तरह दिखाई देता है। हालांकि बारिश के मौसम में रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं इसलिए सावधानी आवश्यक होती है।

गर्मियों में यात्रा की जा सकती है लेकिन दोपहर के समय तापमान अधिक होने के कारण सुबह जल्दी या शाम के समय घूमना बेहतर रहता है।

Chaiturgarh Fort यात्रा का संभावित बजट

चैतुरगढ़ की यात्रा का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार की यात्रा करना चाहते हैं।

यात्रा प्रकारप्रतिदिन अनुमानित खर्च
बैकपैकर यात्रा₹1200 से ₹2500
मिड रेंज यात्रा₹3000 से ₹6500
आरामदायक यात्रा₹7000 से ₹15000 या अधिक

अगर आप कोरबा में रुककर यात्रा करते हैं तो खर्च को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

चैतुरगढ़ किले के प्रमुख आकर्षण

किले का मुख्य प्रवेश क्षेत्र

जब आप किले के मुख्य क्षेत्र में पहुंचते हैं तो सबसे पहले उसकी विशालता का एहसास होता है। आज भले ही किले के कई हिस्से समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुके हैं लेकिन जो अवशेष मौजूद हैं वे इसकी भव्यता का अंदाजा लगाने के लिए पर्याप्त हैं।

इन पत्थरों को देखकर अक्सर मन में यह प्रश्न उठता है कि आखिर इतने कठिन पहाड़ी क्षेत्र में इस तरह का निर्माण कैसे किया गया होगा।

प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था

चैतुरगढ़ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह किला ऊंचे पहाड़ पर स्थित है और चारों ओर प्राकृतिक अवरोध मौजूद हैं।

इसी कारण इसे प्राचीन समय में अत्यंत सुरक्षित माना जाता था। यहां से आसपास के क्षेत्रों पर दूर तक नजर रखी जा सकती थी।

जब आप किले के ऊंचे हिस्सों में खड़े होते हैं तो समझ आता है कि यह स्थान रणनीतिक दृष्टि से कितना महत्वपूर्ण रहा होगा।

प्राचीन दीवारें और अवशेष

किले के कई हिस्सों में आज भी पुरानी दीवारों के अवशेष दिखाई देते हैं। इन दीवारों को देखकर यह कल्पना करना कठिन नहीं है कि कभी यहां सैनिकों की गतिविधियां होती होंगी।

समय ने बहुत कुछ नष्ट कर दिया है लेकिन इतिहास अभी भी इन पत्थरों में मौजूद है।

मां महिषासुरमर्दिनी मंदिर

चैतुरगढ़ की सबसे प्रसिद्ध पहचान यही मंदिर है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर की अत्यधिक मान्यता है। माना जाता है कि यहां स्थापित देवी की प्रतिमा अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है और दूर दूर से लोग दर्शन करने आते हैं।

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। पहाड़ों की शांति और मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा एक अलग अनुभव प्रदान करती है।

नवरात्रि का विशेष महत्व

नवरात्रि के दौरान चैतुरगढ़ का वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

मंदिर में पूजा अर्चना का विशेष आयोजन होता है और पूरा क्षेत्र भक्ति से भर जाता है।

जो लोग धार्मिक अनुभव की तलाश में हैं उनके लिए यह समय विशेष माना जाता है।

पहाड़ी दृश्य

किले की ऊंचाई इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती भी है।

ऊपर से देखने पर दूर तक फैले जंगल पहाड़ और घाटियां दिखाई देती हैं। यह दृश्य किसी भी प्रकृति प्रेमी को प्रभावित कर सकता है।

सुबह और शाम के समय यहां का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक माना जाता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त

अगर आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं तो सूर्योदय और सूर्यास्त का समय बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए।

जब सूर्य की किरणें पहाड़ों पर पड़ती हैं तो पूरा क्षेत्र सुनहरे रंग में रंग जाता है। यह दृश्य लंबे समय तक याद रहता है।

शांत वातावरण

आज के समय में बहुत से पर्यटन स्थल भीड़ और शोर से भर चुके हैं लेकिन चैतुरगढ़ अभी भी अपेक्षाकृत शांत अनुभव प्रदान करता है।

यही शांति इसे विशेष बनाती है।

Chaiturgarh Fort का स्थानीय भोजन और संस्कृति

चैतुरगढ़ की यात्रा केवल किला देखने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आसपास के क्षेत्रों में आपको छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है।

स्थानीय भोजन में चावल आधारित व्यंजनों का महत्वपूर्ण स्थान है। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी स्वाद यहां के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर आपको इस क्षेत्र की कई रोचक कहानियां और मान्यताएं सुनने को मिल सकती हैं।

यही अनुभव यात्रा को अधिक वास्तविक और यादगार बनाते हैं।

तीन दिन की यात्रा योजना

पहले दिन कोरबा पहुंचें और स्थानीय स्थलों को देखें।

दूसरे दिन पूरा समय Chaiturgarh Fort और मां महिषासुरमर्दिनी मंदिर के दर्शन के लिए रखें। जल्दबाजी बिल्कुल न करें क्योंकि इस स्थान को महसूस करने के लिए समय चाहिए।

तीसरे दिन आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों और स्थानीय संस्कृति को समझें और फिर वापसी करें।

सात दिन की विस्तृत यात्रा योजना

पहला दिन कोरबा पहुंचने और विश्राम के लिए रखें।

दूसरा दिन स्थानीय संस्कृति और बाजारों को समझने में बिताएं।

तीसरा दिन चैतुरगढ़ किले के विस्तृत भ्रमण के लिए रखें।

चौथा दिन मंदिर और धार्मिक गतिविधियों को समर्पित करें।

पांचवां दिन फोटोग्राफी और प्रकृति दर्शन के लिए रखें।

छठा दिन आसपास के अन्य स्थलों को देखने में बिताएं।

सातवां दिन यात्रा के अनुभवों को समेटते हुए वापसी की तैयारी करें।

जिम्मेदार और सतत पर्यटन

चैतुरगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत है।

किले की दीवारों पर नाम नहीं लिखना चाहिए।

मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

प्लास्टिक और कचरा बिल्कुल नहीं फैलाना चाहिए।

स्थानीय लोगों और उनकी परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।

अगर हम ऐसे स्थलों की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियां इनके वास्तविक स्वरूप को देखने से वंचित रह जाएंगी।

सुरक्षा और उपयोगी सुझाव

पहाड़ी मार्ग पर सावधानी से चलें।

आरामदायक जूते पहनें।

पर्याप्त पानी साथ रखें।

बारिश के मौसम में फिसलन से बचें।

बच्चों और बुजुर्गों के साथ अतिरिक्त सावधानी बरतें।

सूर्यास्त के बाद अकेले सुनसान क्षेत्रों में जाने से बचें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. चैतुरगढ़ किले को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण किलों में क्यों गिना जाता है

चैतुरगढ़ केवल एक किला नहीं है बल्कि यह इतिहास धर्म और प्रकृति का संगम है। इसकी ऊंचाई प्राकृतिक सुरक्षा और मां महिषासुरमर्दिनी मंदिर की उपस्थिति इसे राज्य के अन्य किलों से अलग पहचान देती है।

2. क्या चैतुरगढ़ परिवार के साथ घूमने योग्य स्थान है

हां लेकिन पहाड़ी मार्ग होने के कारण कुछ शारीरिक तैयारी आवश्यक होती है। परिवार के साथ यात्रा करने पर पर्याप्त समय और सावधानी दोनों रखनी चाहिए।

3. क्या यहां बच्चों को लाना उचित रहेगा

बच्चों को इतिहास और प्रकृति दोनों के बारे में सीखने का अवसर मिल सकता है लेकिन पहाड़ी रास्तों के कारण उन पर नजर रखना आवश्यक है।

4. क्या यहां एक दिन में घूमना संभव है

मुख्य स्थल एक दिन में देखे जा सकते हैं लेकिन पूरे अनुभव का आनंद लेने के लिए दो दिन का समय अधिक उपयुक्त माना जाता है।

5. क्या यहां फोटोग्राफी की जा सकती है

हां। यह स्थान फोटोग्राफी के लिए अत्यंत आकर्षक माना जाता है क्योंकि यहां इतिहास और प्राकृतिक दृश्य दोनों मौजूद हैं।

6. मां महिषासुरमर्दिनी मंदिर का महत्व क्या है Mahishasur Mardini Temple क्यों प्रसिद्ध है ?

यह मंदिर स्थानीय श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है और नवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं।

7. Chaiturgarh Fort कहाँ स्थित है?

चैतुरगढ़ किला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित है। यह पहाड़ी पर बना एक प्राचीन और प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है।

8. चैतुरगढ़ किले तक कैसे पहुँचा जा सकता है?

कोरबा से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। अंतिम हिस्से तक सीढ़ियों और पैदल ट्रेकिंग करनी पड़ती है।

9. चैतुरगढ़ किला घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है, जब मौसम सुहावना रहता है।

10. चैतुरगढ़ किले का इतिहास क्या है?

यह प्राचीन किला कलचुरी काल से जुड़ा माना जाता है और धार्मिक व ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

11. क्या चैतुरगढ़ किले तक ट्रेकिंग करनी पड़ती है?

हाँ, वाहन पार्किंग के बाद किले तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों से पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

12. क्या यहां भीड़ रहती है क्या यहां बुजुर्गों को परेशानी हो सकती है

सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत कम भीड़ रहती है लेकिन नवरात्रि में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। चढ़ाई के कारण कुछ कठिनाई हो सकती है इसलिए स्वास्थ्य के अनुसार योजना बनानी चाहिए।

13. चैतुरगढ़ किले के पास कौन-कौन से पर्यटन स्थल हैं?

आसपास के प्रमुख आकर्षणों में Kendai Waterfall, Lemru Elephant Reserve और Satrenga शामिल हैं।

14. क्या चैतुरगढ़ छत्तीसगढ़ के छिपे हुए रत्नों में गिना जाता है

हां। अभी भी बहुत से पर्यटक इसके बारे में नहीं जानते इसलिए यह अपेक्षाकृत कम चर्चित लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।

15. क्या यहां सूर्योदय देखना विशेष अनुभव होता है

कई यात्रियों के अनुसार सूर्योदय के समय यहां का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है।

16. क्या यहां कैंपिंग की जा सकती है

यात्रा से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी लेना आवश्यक है क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों में अलग व्यवस्थाएं हो सकती हैं।

17. क्या यह रोमांच प्रेमियों के लिए अच्छा स्थान है

हां। पहाड़ी मार्ग और प्राकृतिक वातावरण रोमांच पसंद करने वालों को आकर्षित करते हैं।

18. क्या यहां स्थानीय संस्कृति देखने को मिलती है

आसपास के गांवों और स्थानीय लोगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति को समझा जा सकता है।

19. क्या चैतुरगढ़ की यात्रा यादगार बन सकती है

जो लोग केवल फोटो लेने नहीं बल्कि किसी स्थान को महसूस करने जाते हैं उनके लिए यह यात्रा लंबे समय तक याद रहने वाली साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

चैतुरगढ़ किला उन स्थानों में शामिल है जो हमें यह याद दिलाते हैं कि इतिहास केवल पुस्तकों में नहीं रहता। वह पहाड़ों पर भी रहता है। वह टूटी हुई दीवारों में भी रहता है। वह मंदिर की घंटियों में भी सुनाई देता है और जंगलों की खामोशी में भी महसूस होता है।

आज जब आधुनिक जीवन की गति लगातार बढ़ती जा रही है तब चैतुरगढ़ जैसे स्थान हमें ठहरने और अतीत को समझने का अवसर देते हैं। यहां पहुंचने वाला व्यक्ति केवल एक किला नहीं देखता बल्कि वह उस समय की कल्पना करता है जब यह स्थान शक्ति आस्था और सुरक्षा का केंद्र रहा होगा।

मेरा अनुभव

अगर मुझे चैतुरगढ़ के बारे में एक भावना में अपनी बात कहनी हो तो मैं इसे ऊंचाई पर बसा हुआ इतिहास कहूंगा।

मैं कल्पना करता हूं कि सुबह का समय है और मैं धीरे धीरे पहाड़ी रास्ते से ऊपर जा रहा हूं। रास्ते में केवल हवा की आवाज सुनाई दे रही है। नीचे दूर तक फैले जंगल दिखाई दे रहे हैं। जैसे जैसे ऊंचाई बढ़ती है वैसे वैसे मन में उत्सुकता भी बढ़ती जाती है।

किले तक पहुंचने के बाद शायद मैं कुछ देर किसी पत्थर पर बैठकर केवल आसपास के वातावरण को महसूस करता। कई बार किसी स्थान की वास्तविक सुंदरता उसकी संरचनाओं में नहीं बल्कि उसके वातावरण में छिपी होती है। चैतुरगढ़ मुझे ऐसा ही स्थान लगता है।

मां महिषासुरमर्दिनी मंदिर में पहुंचकर शायद मन अपने आप शांत हो जाए। पहाड़ों के बीच स्थित मंदिरों में एक अलग प्रकार की ऊर्जा महसूस होती है। वहां खड़े होकर व्यक्ति केवल दर्शन नहीं करता बल्कि स्वयं के भीतर भी झांकने लगता है।

यही कारण है कि मेरे लिए चैतुरगढ़ केवल एक किला नहीं बल्कि इतिहास प्रकृति और आध्यात्मिकता का ऐसा संगम है जिसे महसूस किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।

Sateesh Kumar