रायगढ़ के 3 प्रसिद्ध देवी मंदिर, जहां दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं हजारों भक्त रायगढ़ में कई धार्मिक स्थल हैं, लेकिन कुछ देवी मंदिर ऐसे हैं जिनसे लोगों की आस्था लंबे समय से जुड़ी हुई है। नवरात्रि और दूसरे विशेष अवसरों पर इन मंदिरों में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। देवी माँ के ज्योति कलश का दर्शन करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर हो जाते है
अगर आप रायगढ़ घूमने के साथ माता के दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां के प्रसिद्ध देवी मंदिरों की यात्रा कर सकते हैं। यदि आप इस नवरात्रि में रायगढ़ घूमने का योजना बना रहे है, तो रायगढ़ के 3 प्रसिद्ध देवी मंदिर चंद्रहासिनी माता, मां बूढ़ी माई मंदिर, नाथलदाई के दर्शन कर सकते है और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है
चंद्रहासिनी माता का मंदिर महानदी के किनारे में है महानदी तट के किनारे में एक छोर में टापूनुमा मंदिर नाथलदाई का है तो दूसरे छोर में चंद्रहासिनी मईया का मंदिर है। नाथल दाई माता कि कहानी प्रत्यक्ष और रोमांचक लगता है क्योंकि लोगों ने यहां कि घटना को अपने आंखों से देखा हैं यह की कहानी सन 1994 की बताई जाती हैं।
रायगढ़ के इन देवी मंदिरों की क्या है खासियत
बूढ़ी माई मंदिर रायगढ़ शहर यह मंदिर 1000 वर्ष से अधिक पुराना है और इसे रायगढ़ की कुलदेवी या ‘नगर देवी’ के रूप में पूजा जाता है।
नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष श्रृंगार, अनुष्ठान और विदेशों से भी लोग माता के दर्शन करने के लिए आते है दूर-दूर से लोग अपने उज्वल भविष्य, खुशहाल जीवन और परिवार की सुख शांति के लिए ज्योति-कलश जलवाते हैं और अपने जीवन में माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करते है
चंद्रहासिनी माता मंदिर बरमकेला चंद्रपुर क्षेत्र – यह महानदी के तट पर स्थित एक बेहद प्रसिद्ध और प्राचीन शक्तिपीठ है। यहाँ देवी चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और यहाँ का प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक परिवेश का खास अनुभव करते है
नाथल दाई मंदिर छत्तीसगढ़ के चंद्रपुर में महानदी तट पर स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। इसकी महिमा यह है कि महानदी में भयंकर बाढ़ आने पर भी यह मंदिर कभी नहीं डूबता; पानी माँ के चरण छूकर लौट जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता की उत्पत्ति देवी सरस्वती की नथ (नाक के आभूषण) से हुई थी, जिससे इनका नाम ‘नाथल दाई’ पड़ा। मान्यता है कि यहाँ दर्शन मात्र से सभी पाप दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
1 मां चंद्रहासिनी मंदिर
मंदिर की धार्मिक मान्यता
मां चंद्रहासिनी मंदिर रायगढ़ जिले के चंद्रपुर में महानदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध देवी मंदिर है। रायगढ़ से मां चंद्रहासिनी मंदिर (चन्द्रपुर) की दूरी 30 से 32 किलोमीटर है। माता चंद्रहासिनी को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां माता के दर्शन और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इसी विश्वास के कारण आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दूर से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं दर्शन करने के लिए।
मंदिर के आसपास धार्मिक माहौल के साथ प्राकृतिक सुंदरता भी देखने को मिलती है। सुबह और शाम के समय यहां का वातावरण खास तौर पर अच्छा लगता है। परिवार के साथ आने वाले लोगों के लिए यह धार्मिक यात्रा के साथ एक अच्छा घूमने का अनुभव भी बन जाता है।
नवरात्रि में विशेष आयोजन
नवरात्रि के दौरान मां चंद्रहासिनी मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
नवरात्रि के दिनों में मंदिर परिसर में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। सुबह से लेकर शाम तक भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। अगर आप नवरात्रि में यहां जाने का प्लान बना रहे हैं, तो भीड़ को ध्यान में रखते हुए यात्रा की तैयारी करना बेहतर रहेगा।
रायगढ़ से चंद्रहासिनी मंदिर की दूरी और पहुंचने का तरीका
मां चंद्रहासिनी मंदिर रायगढ़ जिले के चंद्रपुर में स्थित है। रायगढ़ से चंद्रपुर जाने के लिए सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है। निजी वाहन से यात्रा करना परिवार के साथ सुविधाजनक रहता है।
स्थानीय बस और अन्य उपलब्ध साधनों से भी चंद्रपुर पहुंचा जा सकता है। जिसमे समय और पैसे अधिक खर्च हो सकते है
स्थान – रायगढ़ से चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर की दूरी लगभग 29.5 से 30 किलोमीटर है।
2 नाथलदाई मंदिर
मान्यता है कि जब देवी का नथ नदी में गिरा, तब उसने इसी जगह पर मूर्त रूप धारण कर लिया. महानदी के तट पर बसी नाथलदाई हमेशा से यहां के लोगों की रक्षा करती आई हैं.
यहां मां का बायां कपोल गिरा
मान्यता के अनुसार माता सती का बायां कपोल महानदी के पास स्थित पहाड़ी में गिरा, जो आज बाराही मां चंद्रहासिनी मंदिर के रूप में जाना जाता है. मां की नथनी नदी के बीच टापू में जा गिरी, जिसे आज नाथलदाई मंदिर के नाम से जाना जाता है
माँ ने बच्चे की जिंदगी बचाई थी
कहा जाता है कि मां चंद्रहासिनी और उनकी छोटी बहन नाथलदाई के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है. मां चंद्रहासिनी और नाथलदाई की एक पौराणिक कथा भी है जिसमें एक निर्दयी पिता ने अपने छोटे बच्चे को पुल के ऊपर से नदी में फेंक देता है
जिसे मां चंद्रहासनी और नाथलदाई अपने आंचल में रख लेती हैं और मासूम की जान बच जाती है. घटना के बाद से भक्तों की मां के ऊपर श्रद्धा और बढ़ गई. इसके बाद चंद्रपुर में नवरात्र के साथ-साथ साधारण दिन में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दरबार में आकर उनका आशीर्वाद लेते हैं. वहीं चंद्रपुर मंदिर परिसर में अन्य मूर्ति एवं झांकी मन को मोहित कर देते हैं.
मंदिर की बनावट – यह नदी के बीच में टापूनुमा स्थान पर एक किनारे में बना हुआ है और चारों ओर से महानदी के जल से घिरा हुआ है. बरसात के दिनों में नदी अपने उफान पर रहती है. जब बाढ़ की स्थिति आती है, तो आसपास के कई गांव-कस्बे डूब जाते हैं, लेकिन मंदिर कभी नहीं डूबता. कहा जाता है कि जब भी बाढ़ आती है,
उसका पानी मंदिर की सीढ़ियों के चरण स्पर्श करने के बाद अपने आप नीचे उतर जाता है. इस मंदिर की नाथल दाई देवी को ज्ञानी और सुखदायिनी बताते हैं, क्योंकि यह सरस्वती माता के नथ से प्रकट हुई है. आम दिनों में यहां हजारों लोगों की भीड़ लगी रहती थी
मां ने राजा को दिया सपना
दूसरी कथा के अनुसार एक बार संबलपुर के राजा चन्द्रहास जंगल में आखेट करने आए थे, तब वो एक जानवर का पीछा करने लगे इस दौरान जंगल के बहुत दूर धने जंगल तक आ गए और जैसे ही राजा चन्द्रहास ने जानवर को मारने के लिए धनुष उठाया तब जानवर ने देवी रूप धारण कर लिया और वहां से अंतर्ध्यान हो गईं
उसी रात देवी ने सपने में आकर राजा से कहा कि, राजन तुम यहां मेरा मंदिर बनवाओ और अपनी ‘यश कीर्ति बढ़ाओ’
स्थान – रायगढ़ से माँ नाथलदाई मंदिर (यह मंदिर टिमरलगा गांव, सारंगढ़-बिलाईगढ़ / चंद्रपुर के पास) की दूरी लगभग 30 से 32 किलोमीटर है यह महानदी के तट पर स्थित है
3 मां बूढ़ी माई मंदिर रायगढ़
आस्था का प्रमुख केंद्र मां बूढ़ी माई मंदिर रायगढ़ शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में से एक है। यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच काफी जाना-पहचाना है। शहर में स्थित होने के कारण यहां आसपास के लोग आसानी से माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर में श्रद्धालु माता की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं। सामान्य दिनों में भी भक्त यहां दर्शन के लिए आते रहते हैं।
स्थानीय लोगों की आस्था
मां बूढ़ी माई मंदिर से स्थानीय लोगों की आस्था लंबे समय से जुड़ी हुई है। कई परिवार विशेष अवसरों पर माता के दर्शन करने आते हैं। लोगों के लिए यह मंदिर धार्मिक विश्वास के साथ-साथ शहर की स्थानीय पहचान का भी हिस्सा है।
सुबह और शाम के समय मंदिर में भक्तों की आवाजाही देखने को मिलती है। शांत वातावरण में माता के दर्शन करना श्रद्धालुओं को अच्छा अनुभव देता है।
स्थान: दरोगापारा, अग्रसेन कॉलोनी, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से दूरी लगभग 1.4 से 1.7 किलोमीटर है।
विशेष पर्व और नवरात्रि
नवरात्रि के समय मां बूढ़ी माई मंदिर में भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और मंदिर में भक्तिमय वातावरण रहता है।
अन्य धार्मिक पर्वों पर भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। अगर आप नवरात्रि में दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना सुविधाजनक हो सकता है।
मां बूढ़ी माई मंदिर तक कैसे पहुंचने
रायगढ़ शहर में होने के कारण मां बूढ़ी माई मंदिर तक पहुंचना आसान है। शहर के अलग-अलग हिस्सों से स्थानीय साधन, ऑटो या निजी वाहन से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। दर्शन के लिए जाने से पहले मंदिर के आसपास की स्थानीय व्यवस्था और भीड़ को ध्यान में रखना अच्छा रहेगा।
इन मंदिरों तक कैसे पहुँचें ?
आप मुख्य शहर रायगढ़ से मां चंद्रहासिनी मंदिर (चन्द्रपुर) या अन्य मंदिरों तक आसानी से पहुँच सकते है। आप को तीनों मंदिर तक जाने के लिए बस आटो या आप अपने बजट और सुविधा के अनुसार बुकिंग भी कर सकते है
- स्थान: यह प्रसिद्ध मंदिर छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के चंद्रपुर में महानदी और मांड नदी के संगम के पास स्थित है।
- दूरी
- रायगढ़ से: लगभग 30-32 कि.मी.
- सारंगढ़ से: लगभग 20 कि.मी.
- रायपुर से: लगभग 220-221 कि.मी.
- बिलासपुर से दूरी : लगभग 138 से 169 किलोमीटर (सड़क मार्ग द्वारा)
- चांपा से दूरी : लगभग 90 किलोमीटर (सड़क मार्ग द्वारा)
- कोरबा से दूरी : लगभग 135 किलोमीटर (सड़क मार्ग द्वारा)
रायपुर से चंद्रहासिनी मंदिर कैसे पहुँचें?
- सड़क मार्ग: रायपुर से कार या बस द्वारा सक्ती, डभरा अथवा चंद्रपुर की ओर जाने वाले मार्ग से पहुँच सकते हैं।
- रेल मार्ग: जांजगीर-नैला और चांपा रेलवे स्टेशन नजदीकी प्रमुख रेल विकल्पों में शामिल हैं। वहाँ से सड़क मार्ग से मंदिर जा सकते हैं।
- हवाई मार्ग: रायपुर हवाई अड्डा प्रमुख विकल्प है। वहाँ से आगे सड़क मार्ग से यात्रा करनी होगी।
रायगढ़ के इन 3 देवी मंदिरों की यात्रा कब और कैसे करें ?
रायगढ़ जाने का सबसे अच्छा समय
रायगढ़ के देवी मंदिरों में दर्शन के लिए नवरात्रि का समय खास माना जाता है। इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं। हालांकि, इस समय भीड़ अधिक होती है। अगर आप शांत माहौल में दर्शन करना चाहते हैं तो सामान्य दिनों में सुबह का समय बेहतर रहेगा।
नवरात्रि के समय आप दर्शन करने जाते है तो विशेष फल प्राप्त होते है माँ के दिव्य रूप का दर्शन करते है इस समय में माता रानी की शक्ति अपने चरम पर होती है सच्चे मन से जो भी भक्त मनोकामना ले कर माता के मंदिर में जाते है उनकी कामनाए पूरी होता है
एक दिन का यात्रा प्लान
एक दिन की यात्रा में सुबह रायगढ़ शहर से शुरुआत की जा सकती है। पहले मां बूढ़ी माई मंदिर और मां बंजारी मंदिर के दर्शन करने के बाद चंद्रपुर की ओर जाकर मां चंद्रहासिनी मंदिर वा नाथल दाई के दर्शन कर सकते हैं।
यात्रा का समय रास्ते और आपकी सुविधा के अनुसार बदल सकता है, इसलिए निकलने से पहले पूरे दिन का समय देखकर योजना बनाना बेहतर रहेगा।
आसपास खाने-पीने की जगह
मंदिरों की यात्रा के दौरान खाने-पीने के लिए रायगढ़ शहर और चंद्रपुर के आसपास स्थानीय दुकानें और छोटे भोजनालय मिल जाते हैं। यात्रा पर निकलते समय पानी की बोतल साथ रखना भी अच्छा रहेगा।
यात्रा के जरूरी सुझाव
नवरात्रि के समय मंदिरों में काफी भीड़ हो सकती है, इसलिए समय लेकर यात्रा करें। गर्मी के दिनों में पानी साथ रखें और बच्चों व बुजुर्गों के साथ जा रहे हैं तो उनकी सुविधा का ध्यान रखें। मंदिर परिसर में साफ-सफाई बनाए रखें और स्थानीय नियमों का पालन करें।
रायगढ़ के इन देवी मंदिरों की यात्रा धार्मिक आस्था के साथ जिले की स्थानीय संस्कृति और वातावरण को करीब से जानने का अच्छा अवसर भी देती है। अगर आप रायगढ़ घूमने की योजना बना रहे हैं, तो इन मंदिरों को अपनी यात्रा में जरूर शामिल कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बूढ़ी माई मंदिर रायगढ़ का इतिहास ?
बूढ़ी माई मंदिर, रायगढ़ का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यह मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था, लोक मान्यताओं और चमत्कारी धार्मिक इतिहास से जुड़ा हुआ है।
रायगढ़ की कुलदेवी कौन है ?
रायगढ़वासी माता बूढ़ी माई को अपने परिवार की कुलदेवी मानते हैं। परंपरा के अनुसार, घर में कोई भी शुभ काम (जैसे शादी, मुंडन या नया व्यवसाय) शुरू करने से पहले माता को निमंत्रण पत्र देना या उनका आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना जाता है
चंद्रहासिनी मंदिर रायगढ़ से कितनी दूर है ?
रायगढ़ शहर से मंदिर की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 30 किलोमीटर है। वाहन से पहुँचने में करीब 40–60 मिनट लग सकते हैं, जो रास्ते और यातायात पर निर्भर करता है।
चंद्रहासिनी मंदिर कहाँ स्थित है ?
माँ चंद्रहासिनी देवी का प्रसिद्ध मंदिर छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के चंद्रपुर नगर में महानदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर डभरा तहसील क्षेत्र में आता है।
निष्कर्ष
रायगढ़ के मां चंद्रहासिनी मंदिर, मां बूढ़ी माई मंदिर, बूढ़ी माई मंदिर और मां बंजारी मंदिर तीनों का अपना अलग धार्मिक महत्व है। इन मंदिरों में सालभर श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन नवरात्रि के समय यहां भक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। मां चंद्रहासिनी मंदिर का महानदी किनारे का सुंदर वातावरण भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
अगर आप रायगढ़ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इन तीनों देवी मंदिरों को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। यहां माता के दर्शन करने के साथ आपको स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर भी मिलेगा। यात्रा पर निकलने से पहले रास्ते और आने-जाने के साधनों की जानकारी जरूर ले लें, ताकि आपकी यात्रा आसान और यादगार बन सके।