बस्तर छत्तीसगढ़ के 26 पारंपरिक व्यंजन: स्वाद और संस्कृति का अनोखा संगम

छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र अपने घने जंगलों, अनूठी जनजातीय संस्कृति और अद्भुत खान-पान के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। बस्तर के पारंपरिक व्यंजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि यहाँ की जनजातियों (जैसे गोंड, मारिया, हल्बा) की जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव का प्रतीक हैं।

बस्तर की थाली में आपको सादगी, शुद्धता और औषधीय गुणों का एक बेहतरीन संतुलन देखने को मिलेगा

बस्तर (छत्तीसगढ़) की पारंपरिक पाक कला प्रकृति, आदिवासी संस्कृति और वनांचल की उपज का अनूठा मेल है। यहाँ के व्यंजनों में 50 से अधिक प्रकार के औषधीय वनोपज, कंद-मूल, बांस के कोपले और मौसमी साग-सब्जियाँ शामिल होती हैं, जो स्वास्थ्य और स्वाद का अद्भुत संगम पेश करते हैं। बस्तर के प्रमुख पारंपरिक व्यंजन और खाद्य सामग्री

बस्तर छत्तीसगढ़ के 27 पारंपरिक व्यंजन, स्वाद और संस्कृति का अनोखा संगम

छत्तीसगढ़ का दक्षिणी वनांचल ‘बस्तर’ अपनी प्राचीन जनजातीय कला, घने जंगलों और अद्वितीय जीवनशैली के लिए जाना जाता है। लेकिन बस्तर की पहचान का एक और सबसे खूबसूरत पहलू है—यहाँ का खान-पान। बस्तर के पारंपरिक व्यंजन (Bastar Traditional Food) केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी सादगी, शुद्धता और अद्भुत औषधीय गुणों (Medicinal Properties) के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं।

गोंड, मारिया और हल्बा जैसी स्थानीय जनजातियों का भोजन पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर है। यहाँ के व्यंजनों में आपको आधुनिक तेल-मसालों की जगह बस्तर के जंगलों से मिलने वाले ताज़ा और शुद्ध अवयवों का अनूठा स्वाद मिलेगा। आइए, बस्तर और छत्तीसगढ़ के उन 26 मुख्य व्यंजनों के सफर पर चलते हैं, जो बस्तरिया संस्कृति का असली आइना हैं।

बस्तर के 7 सबसे प्रसिद्ध और अनोखे जंगली व्यंजन (Bastar Unique Tribal Food)

छत्तीसगढ़ का बस्तर (Bastar) अपने आप में अद्भुत है. प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बस्तर यहां मिलने वाले वनोपज के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यही नहीं यहां आदिवासियों के द्वारा तैयार की जाने वाले लोकल व्यंजन के लाखों लोग दीवाने हैं. देश-दुनिया से बस्तर घूमने आने वाले पर्यटकों की बस्तरिया भात पहली पसंद रहती है

बस्तर के 7 सबसे प्रसिद्ध और अनोखे जंगली व्यंजन (Bastar Unique Tribal Food)

1. चापड़ा चटनी (Chapra Chutney) – लाल चींटी की तीखी चटनी

चापड़ा चटनी (Chapda Chatni) यह बस्तर का सबसे अनोखा और विश्व प्रसिद्ध व्यंजन है। इसे पेड़ों पर रहने वाली लाल बुनकर चींटियों (Red Weaver Ants) और उनके अंडों को अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के साथ पीसकर बनाया जाता है। यह चटनी स्वाद में बेहद खट्टी-तीखी होती है और प्रोटीन, फार्मिक एसिड व जिंक का बेहतरीन स्रोत है। स्थानीय लोग इसका सेवन सर्दी, खांसी और मौसमी बुखार से बचने के लिए करते हैं।

चापड़ा चटनी के औषधीय लाभ (Health Benefits)

  • खट्टा-तीखा स्वाद: चींटियों में मौजूद फार्मिक एसिड इसे प्राकृतिक रूप से चटपटा और खट्टा बनाता है
  • पोषक तत्वों का पावरहाउस: यह चटनी प्रोटीन, जिंक, आयरन और विटामिन B-12 का समृद्ध स्रोत है।
  • नेचुरल एंटीबायोटिक: बस्तर के लोग इसे सर्दी, कफ, बदन दर्द और मलेरिया की अचूक दवा मानते हैं।
  • आँखों के लिए फायदेमंद: इसके नियमित सेवन से आँखों की रोशनी बढ़ती है और थकान दूर होती है

2. बस्तरिया आमट (Amat) – बस्तर का पारंपरिक सूप और सांभर

आमट (Aamat) इसे ‘बस्तर का सांभर’ कहा जाता है। यह मिश्रित सब्जियों और बांस के करिज़ (बास्ता) से बिना तेल के बनने वाली एक प्रसिद्ध और स्वास्थ्यवर्धक पारम्परिक कढ़ी है।

आमट बस्तर का एक सिग्नेचर सूप या करी है। इसे बिना तेल के, बांस के कोमल करील (बास्ता) और मौसमी मिश्रित हरी सब्जियों को चावल के आटे के घोल (पेज) के साथ उबालकर बनाया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है, जिससे इसकी महक और स्वाद दोगुना हो जाता है।

स्वास्थ्य लाभ: मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पकने के कारण इसमें एक बेहतरीन सौंधी खुशबू आती है। खट्टी भाजी और बांस के करील के कारण इसका स्वाद हल्का खट्टा और बेहद ताज़ा होता है। यह बिना तेल का भोजन पाचन क्रिया के लिए अमृत समान माना जाता है।

3. बास्ता सब्जी (Bamboo Shoot) – बांस के करील का स्वाद

बास्ता की सब्जी (Basta Curry): वर्षा ऋतु में उगने वाले बांस के नए व कोमल अंकुरित डंठलों (बांस के कोपलों) से तैयार की जाने वाली स्वादिष्ट सब्जी। जिन्हें ‘बास्ता’ कहा जाता है। बास्ता को बारीक काटकर, पानी में उबालकर उसकी कड़वाहट निकाली जाती है और फिर उसकी सूखी या रसेदार सब्जी बनाई जाती है। यह फाइबर से भरपूर होती है।

स्वास्थ्य लाभ: बास्ता फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यह रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित करने और वजन घटाने वाले लोगों के लिए एक आदर्श जंगली सुपरफूड है।

4. पुटुआ मशरूम (Putua Mushroom)

बोड़ा की तरह ही पुटुआ भी बस्तर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला एक स्वादिष्ट मशरूम है। यह पूरी तरह सफेद और बेहद नाजुक होता है। इसे हल्के स्थानीय मसालों और टमाटर के साथ भूनकर पकाया जाता है, जो चावल के साथ बेहतरीन स्वाद देता है।

स्वास्थ्य लाभ: (Putua Mushroom Benefits)

शुगर-बीपी में मददगार: जीरो फैट होने से यह डायबिटीज और ब्लड प्रेशर मरीजों के लिए बेस्ट है।
मजबूत हड्डियां: इसमें मौजूद विटामिन डी और पोटेशियम हड्डियों को ताकत देते हैं।
स्वस्थ दिल: यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारकर दिल को दुरुस्त रखता है।

5. बोड़ा सब्जी (Boda Sabji) – साल वनों का अनमोल मशरूम

बोड़ा एक प्रकार का दुर्लभ और प्राकृतिक मशरूम है, जो केवल बारिश के शुरुआती दिनों में साल (Sorea Robustal) के पेड़ों के नीचे मिट्टी के भीतर उगता है। इसकी ऊपरी परत सख्त और अंदर से यह बेहद नरम होता है। बस्तर के बाजारों में यह हजारों रुपये किलो बिकता है। इसका मटन जैसा टेक्सचर और सोंधा स्वाद इसे बेहद खास बनाता है।

स्वास्थ्य लाभ: (Boda Sabji Benefits)

मजबूत इम्युनिटी: इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स मौसमी बीमारियों से बचाते हैं।
बेहतर पाचन: हाई-फाइबर सामग्री कब्ज दूर कर पेट साफ रखती है।
प्रोटीन का स्रोत: लो-कैलोरी और हाई-प्रोटीन होने से वजन कंट्रोल रखता है।

6. सुकसी (Suksi) – धूप में पकी सूखी मछली

सुकसी (Suksi) छत्तीसगढ़ के बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में खाई जाने वाली एक प्रसिद्ध सूखी मछली (ड्राय फिश) या सूखा झींगा है। इसे स्थानीय नदियों या तालाबों से पकड़ी गई छोटी मछलियों को धूप में सुखाकर या भूनकर तैयार किया जाता है।

बस्तर जैसे वनांचल क्षेत्रों में प्राचीन काल से ही भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने (Food Preservation) की अद्भुत तकनीकें मौजूद हैं। इसी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है “सुकसी” (Traditional Dried Fish of Bastar)

स्वास्थ्य लाभ: (Suksi Fish Benefits)

तेज दिमाग व आंखें: ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमाग की कार्यप्रणाली और रोशनी बढ़ाता है।
जोड़ों के दर्द से राहत: भारी मात्रा में मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
हेल्दी स्किन व बाल: इसमें मौजूद लीन प्रोटीन बालों और त्वचा में चमक लाता है

7. कंद-मूल व्यंजन (Kanda / Root Vegetables)

कंद-मूल व्यंजन बस्तर के आदिवासी भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जंगलों में मिलने वाले विभिन्न कंद और जड़ों जैसे जिमीकंद, शकरकंद तथा अन्य वन कंदों को उबालकर, भूनकर या मसालों के साथ पकाया जाता है। इनका स्वाद प्राकृतिक और पौष्टिक होता है। पहले के समय में इन्हें जंगल में रहने वाले लोग मुख्य भोजन के रूप में खाते थे।

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आज भी बस्तर के कई गांवों में यह पारंपरिक भोजन बड़े चाव से बनाया जाता है। यह स्थानीय संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी खाद्य परंपरा का प्रतीक है।

स्वास्थ्य लाभ:

फाइबर से भरपूर।

पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।

लंबे समय तक ऊर्जा देता है।

विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत

बस्तर के मशहूर पारंपरिक पेय पदार्थ (Famous Tribal Drinks of Bastar)

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का भोजन पारंपरिक आदिवासी स्वादों और समकालीन भारतीय व्यंजनों का अनूठा मिश्रण है भोजन के अलावा, बस्तर क्षेत्र कई पारंपरिक पेय पदार्थों का भी घर है जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

आदिवासी ग्रामीणजनों के द्वारा इन पेय पदार्थों को बेचकर अच्छी खासी आ्मदनी कमाई जाती है। ये बाज़ार में नहीं मिलते बल्कि एक तरह के पेड़ से निकलने वाले रस से बनते हैं। बस्तर में पेय पदार्थ जैसे सल्फी, महुआ,ताड़ी तथा लांदा का सेवन किया जाता है। माना जाता है कि ये पेय पदार्थ स्वास्थय के लिए भी लाभकारी होते हैं।

बस्तर के मशहूर पारंपरिक पेय पदार्थ (Famous Tribal Drinks of Bastar)

8. मड़िया पेज (Mandia Pej) – बस्तर का नेचुरल कोल्ड ड्रिंक

मड़िया यानी ‘रागी’ (Finger Millet) को पीसकर पानी और थोड़े से पके हुए चावल के साथ मिलाकर मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। इसे हल्का फर्मेंट (खट्टा) होने के लिए रख दिया जाता है। चिलचिलाती गर्मी में बस्तर के ग्रामीण इसे पीकर दिन भर खेतों में बिना थके काम करते हैं। यह कैल्शियम और आयरन का पावरहाउस है।

स्वास्थ्य लाभ

  • शरीर को जबरदस्त ठंडक: इसकी तासीर बेहद ठंडी होती है, जो चिलचिलाती गर्मी में शरीर के तापमान को नियंत्रित रखती है।
  • लू (Heat Stroke) से बचाव: भीषण धूप और गर्मी के मौसम में यह शरीर को डिहाइड्रेशन और लू की चपेट में आने से सुरक्षित रखता है।
  • डायबिटीज में फायदेमंद: रागी में एंटी-ग्लाइसेमिक गुण होते हैं, जिससे यह पेय मधुमेह (Sugar) के मरीजों के लिए रामबाण माना जाता है।
  • हड्डियों को मजबूती: मड़िया (रागी) में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है।
  • पाचन क्रिया में सुधार: इसमें उच्च मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो पेट साफ रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करता है।
  • भूख और प्यास दोनों का इलाज: यह पोषक तत्वों और प्राकृतिक ऊर्जा से भरपूर है, जिसे पीने के बाद लंबे समय तक भूख और प्यास नहीं लगती।
  • पोषक तत्वों का खजाना: इसमें आयरन, प्रोटीन, विटामिन C, मैग्नीशियम और आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जो कुपोषण से लड़ते हैं।

9. सल्फी (Sulfi) – बस्तर की बियर और बस्तरिया संस्कृति का हिस्सा

सल्फी बस्तर के ताड़ (Palm) प्रजाति के एक विशेष पेड़ के तने से निकलने वाला प्राकृतिक मीठा रस है। इसे बस्तर की ‘हर्बल बियर’ भी कहा जाता है। पेड़ से ताज़ा उतरी सल्फी बेहद ठंडी, मीठी और ताज़गी देने वाली होती है। दोपहर बाद इसमें हल्का प्राकृतिक नशा आ जाता है। अधिक समय तक रखने पर इसमें किण्वन (फर्मेंटेशन) हो सकता है।

बस्तर के आदिवासी परिवारों में मेहमानों का स्वागत सल्फी से करना बेहद सम्मानजनक माना जाता है। यह बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक प्रसिद्ध पेय है

स्वास्थ्य लाभ:

शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देता है।

गर्मी में ठंडक पहुंचाता है।

कुछ प्राकृतिक खनिज प्रदान करता है।

नोट: किण्वित होने पर सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।

10. बांस की चाय (Bamboo Shoot Tea)

बांस की चाय बांस की कोमल पत्तियों या बांस के अंकुर से तैयार की जाने वाली हर्बल चाय है। बस्तर के कुछ क्षेत्रों में इसे पारंपरिक औषधीय पेय के रूप में पिया जाता है। इसका स्वाद हल्का और ताजगी देने वाला होता है। स्थानीय लोग इसे सुबह या शाम के समय पीना पसंद करते हैं। यह पूरी तरह प्राकृतिक पेय माना जाता है और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

स्वास्थ्य लाभ:

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर।

शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक।

पाचन में मदद करती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक।

11. लांडा (Landa)

लांडा बस्तर का पारंपरिक किण्वित (फर्मेंटेड) चावल का पेय है। इसे चावल और पारंपरिक जड़ी-बूटियों की सहायता से तैयार किया जाता है। यह आदिवासी समाज के त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रमों में विशेष महत्व रखता है। इसका स्वाद हल्का खट्टा होता है और इसे पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है। यह बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वास्थ्य लाभ:

पाचन में सहायक हो सकता है।

शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

लाभकारी सूक्ष्मजीव (प्रोबायोटिक) हो सकते हैं।

नोट: किण्वित पेय होने के कारण सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए।


चावल और मोटे अनाजों (Millets) से बने मुख्य बस्तरिया पकवान

चावल और मोटे अनाजों से बस्तर में कई स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। प्रमुख पकवानों में बोहे (चावल का चीला), आमता (चावल के माड़ और सब्जी से बना), पेज (माड़), मुड़िया बोहा, मड़ई की रोटी, कोदो-कुटकी का भात और रागी (मड़ैया) से बने पेय व लाटा शामिल हैं। ये व्यंजन यहाँ की संस्कृति का मुख्य हिस्सा हैं। सुबह का सबसे पौष्टिक नाश्ता: चीला, फरा और मुठिया

12. बोबो भजिया (Bobo Bhajiya)

बोबो भजिया बस्तर का लोकप्रिय पारंपरिक नाश्ता है। इसे दाल, चावल और स्थानीय मसालों के मिश्रण से तैयार कर तेल में तला जाता है। बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होने के कारण इसका स्वाद बेहद पसंद किया जाता है। इसे हरी चटनी या टमाटर की चटनी के साथ परोसा जाता है। स्थानीय मेलों और बाजारों में यह आसानी से मिल जाता है।

स्वास्थ्य लाभ:

प्रोटीन का अच्छा स्रोत।

लंबे समय तक पेट भरा रखता है।

शरीर को ऊर्जा देता है।

स्वादिष्ट और पौष्टिक नाश्ता।

13. चीला

चीला बस्तर और छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय पारंपरिक नाश्ता है। इसे चावल या बेसन के घोल में हल्के मसाले मिलाकर तवे पर सेंका जाता है। यह बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम होता है। इसे हरी चटनी, टमाटर की चटनी या दही के साथ परोसा जाता है। सुबह के नाश्ते और शाम के हल्के भोजन के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आज भी पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है।

स्वास्थ्य लाभ:

प्रोटीन और फाइबर से भरपूर।

पाचन के लिए लाभदायक।

लंबे समय तक पेट भरा रखता है।

शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

14. मुठिया (Muthiya)

चावल के आटे में कद्दूकस की हुई सब्जियां और मसाले मिलाकर, मुट्ठी से दबाकर आकार दिया जाता है और भाप में पकाया जाता है। मुठिया चावल के आटे और मसालों से बनाया जाने वाला पारंपरिक व्यंजन है। इसे हाथ से दबाकर आकार दिया जाता है और भाप में पकाया या हल्का तला जाता है। इसका स्वाद सरल लेकिन पौष्टिक होता है।

ग्रामीण परिवार इसे नाश्ते या हल्के भोजन के रूप में बनाते हैं। यह कम तेल में बनने वाला स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन माना जाता है।

स्वास्थ्य लाभ:

कम तेल में तैयार होता है।

पचाने में आसान।

फाइबर से भरपूर।

वजन नियंत्रित रखने में सहायक।

15. बोरे-बासी (Bore Basi) – गर्मी में शरीर को ठंडक देने वाला सुपरफूड

रात के बचे हुए पके हुए चावल को साफ पानी में भिगोकर रात भर के लिए रख दिया जाता है। सुबह इस फर्मेंटेड चावल को प्याज, हरी मिर्च, आम के अचार या भाजी के साथ खाया जाता है। यह पेट को ठंडा रखता है, डिहाइड्रेशन से बचाता है और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इसे आधिकारिक ‘विरासत भोजन’ का दर्जा भी दिया गया है।

  • शरीर को ठंडक और डिहाइड्रेशन से बचाव: इसमें पानी की भरपूर मात्रा होती है, जो गर्मी के दिनों में लू से बचाती है और शरीर का तापमान नियंत्रित रखती है
  • पाचन तंत्र और पेट के लिए वरदान: रातभर भीगे रहने के कारण इसमें फायदेमंद बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) पनपते हैं, जो कब्ज, गैस और अल्सर जैसी पेट की समस्याओं को जड़ से खत्म करते हैं
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16 अंगाकर रोटी (Angakar Roti) – पलाश के पत्तों में लिपटी पारंपरिक रोटी

अंगाकर रोटी (Angakar Roti) छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक और बेहद स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन है,चावल के आटे और पके हुए चावल के मिश्रण से एक मोटी लोई बनाई जाती है। इसे पलाश या सराई के पत्तों के बीच में दबाकर, कंडे (गोबर के उपले) की सुलगती हुई आग के अंदर दबाकर सेका जाता है। पत्तों की महक रोटी के भीतर तक समा जाती है

जिससे इसका स्वाद बेहद सोंधा और लाजवाब हो जाता है।

मुख्य स्वास्थ्य लाभ

  • बेहतर पाचन और गैस से राहत: पलाश या महुआ के पत्तों में लपेटकर सेंके जाने के कारण इसमें प्राकृतिक औषधीय गुण आते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त कर कब्ज मिटाते हैं
  • मोटापा और वजन नियंत्रण: यह बिना तेल या घी के सीधे अंगारों पर सिंकी होती है,
  • जिससे इसमें कैलोरी और फैट बहुत कम होता है और यह वजन घटाने में मदद करती है।

17. चौसेला (Chowsela)

चौसेला छत्तीसगढ़ और बस्तर का प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन है। इसे चावल के आटे से तैयार किया जाता है और पूरी की तरह बेलकर तला जाता है। यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होता है। इसे आलू की सब्जी, चटनी या दाल के साथ परोसा जाता है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर इसका विशेष महत्व होता है।

स्वास्थ्य लाभ:

ग्लूटेन मुक्त भोजन।

जल्दी पच जाता है।

शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देता है।

हल्का और स्वादिष्ट भोजन।

18. गुलगुला (Gulgula)

गुलगुला बस्तर का पारंपरिक मीठा पकवान है, जिसे गेहूं या चावल के आटे, गुड़ और सौंफ से बनाया जाता है। छोटे-छोटे गोल आकार देकर इसे तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है। त्योहारों, पूजा और विशेष अवसरों पर इसका विशेष महत्व होता है। इसका स्वाद मीठा और खुशबूदार होता है। बच्चे और बड़े सभी इसे बड़े चाव से खाते हैं।

स्वास्थ्य लाभ:

शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।

गुड़ से आयरन मिलता है।

पाचन में सहायक।

थकान दूर करने में मदद करता है।


बस्तर के पारंपरिक स्नैक्स और जंगली भाजियाँ (Bastar Traditional Snacks)

छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक पकवान है, जिसे हरतालिका तीज के त्योहार पर विशेष रूप से बनाया जाता है. यह बेसन से तैयार किया जाने वाला एक नमकीन व्यंजन है, जो अपनी सादगी और स्वाद के लिए जाना जाता है. तीज-त्योहारों की शान: बरा (Bara) और ठेठरी बनाया जाता है

19. ठेठरी

ठेठरी छत्तीसगढ़ का एक प्रसिद्ध पारंपरिक नमकीन व्यंजन है। इसे मुख्य रूप से चावल के आटे या बेसन से बनाकर तेल में कुरकुरा तला जाता है। यह त्योहारों, शादी-ब्याह और विशेष अवसरों पर नाश्ते के रूप में खूब पसंद किया जाता है। इसका स्वाद कुरकुरा और हल्का मसालेदार होता है। बेसन में अजवाइन, नमक और मोयन डालकर कड़ा गूंथा जाता है

इसे रस्सी या चक्राकार आकार देकर कुरकुरा तला जाता है। तीज के इस पावन अवसर पर आप भी अपने घर में छत्तीसगढ़ी व्यंजन ठेठरी तैयार कर सकते हैं

20. बाफौरी (Bafauri) – बिना तेल का सेहतमंद भाप व्यंजन

चना दाल के गाढ़े पेस्ट में बारीक कटी प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती और हल्के मसाले मिलाए जाते हैं। इसके बाद बिना एक बूंद तेल के, इसे केवल भाप (Steam) में इडली की तरह पकाया जाता है। यह वजन घटाने वालों के लिए एक आदर्श स्नैक है।

बाफौरी छत्तीसगढ़ का पौष्टिक पारंपरिक व्यंजन है, जिसे चना दाल, हरी सब्जियों और मसालों से बनाकर भाप में पकाया जाता है। तेल में तला नहीं जाता, इसलिए यह हल्का और सुपाच्य होता है। इसे चटनी के साथ खाने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य लाभ :

  • प्रोटीन और फाइबर से भरपूर बाफौरी पाचन के लिए लाभदायक और पौष्टिक होती है।
  • सीमित मात्रा में खाने पर यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

अमारी भाजी और कोलियारी (कोया भाजी) – आयरन से भरपूर हरी पत्तियां

21. अमारी भाजी ” (पटवा भाजी, खट्टा भाजी (Khatta Bhaji)

अमारी भाजी छत्तीसगढ़ की एक बेहद लोकप्रिय पारंपरिक हरी पत्तेदार सब्जी है, जिसे अपने विशिष्ट खट्टे स्वाद के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिक रूप से इसे रोजेल (Roselle या Hibiscus sabdariffa) कहा जाता है, और अंग्रेजी व अन्य राज्यों में इसे गोंगूरा (Gongura) या अंबाड़ी (Ambadi) के नाम से पहचाना जाता है। छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति में इसका इतना महत्व है कि यहाँ के पारंपरिक शादियों के मेनू में इसे मुख्य रूप से शामिल किया जाता है

खट्टा भाजी बस्तर के जंगलों में मिलने वाली अंबाड़ी और अन्य खट्टे पत्तों से बनाई जाती है। इसे लहसुन, मिर्च और मसालों के साथ पकाया जाता है। इसका स्वाद हल्का खट्टा और बेहद स्वादिष्ट होता है। स्थानीय लोग इसे चावल या रोटी के साथ खाते हैं। यह आदिवासी भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वास्थ्य लाभ:

विटामिन C से भरपूर।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।

पाचन में सहायक।

आयरन का अच्छा स्रोत।

22. कोलियारी भाजी (Koliari Bhaji कोया भाजी)

बस्तर के वनांचल में पाई जाने वाली एक दुर्लभ जंगली हरी पत्ती है, जिसके सेवन से शरीर में खून की कमी दूर होती है। कोलियारी भाजी बस्तर के जंगलों में मिलने वाली एक पौष्टिक हरी पत्तेदार सब्जी है। इसे स्थानीय मसालों के साथ पकाया जाता है। इसका स्वाद अनोखा और पौष्टिक होता है।

आदिवासी समुदाय इसे नियमित भोजन में शामिल करता है।

यह प्राकृतिक पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है।

स्वास्थ्य लाभ:

आयरन से भरपूर।

हड्डियों को मजबूत बनाती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।

शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती है।


बस्तर की पारंपरिक मिठाइयाँ (Traditional Sweets of Bastar)

बस्तर की पारंपरिक मिठाइयाँ स्थानीय लोगों में बेहद लोकप्रिय हैं. ये मिठाइयाँ चावल, आटा, गुड़ और तीखुर से बनाई जाती हैं. बस्तर के बाजारों और त्योहारों में इनकी खूब मांग रहती है

23. गुड़िया खाजा : बस्तर दशहरा की खास सौगात

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की एक बेहद पारंपरिक और प्राचीन मिठाई है, जो खासतौर पर स्थानीय हाट-बाजारों और मेलों जैसे प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के दौरान ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों द्वारा बेची जाती थी। यह पारंपरिक मिष्ठान अब धीरे-धीरे बाजारों से विलुप्त होने की कगार पर है

बस्तर की पारंपरिक मिठाइयाँ (Traditional Sweets of Bastar)

विश्व प्रसिद्ध 75 दिनों तक चलने वाले ‘बस्तर दशहरा’ के दौरान जगदलपुर के बाजारों में ‘गुड़िया खाजा‘ की भारी मांग होती है। यह गेहूं या चावल के आटे की परतों वाली एक कुरकुरी मिठाई है, जिसे गुड़ या शक्कर की चाशनी में डुबोकर तैयार किया जाता है।

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गुड़िया खाजा खाने के 2 मुख्य स्वास्थ्य लाभ नीचे दिए गए हैं:

  • तुरंत ऊर्जा का स्रोत: इसे बनाने में कार्बोहाइड्रेट की भरपूर मात्रा होती है, जो त्योहार और मेले की थकान के बाद शरीर को तुरंत और भरपूर एनर्जी प्रदान करती है
  • तनाव मुक्त और मानसिक संतुष्टि: पारंपरिक मीठे पकवान सीमित मात्रा में खाने से शरीर में हैप्पी हार्मोन्स (सेरोटोनिन) रिलीज होते हैं, जो मूड को बेहतर और तनाव को कम करते हैं

24. खुरमी

पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन खुरमी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद (Health Benefits) होती है, बशर्ते इसे सीमित मात्रा में खाया जाए। बाजार के मैदे वाले बिस्कुट और प्रिजर्वेटिव्स युक्त स्नैक्स की तुलना में यह एक बेहद पौष्टिक और घरेलू विकल्प है गेहूं के आटे, गुड़ और सूखे नारियल को मिलाकर ओवल (अंडाकार) शेप में ठोस बिस्कुट की तरह बनाया जाता है,

जो हताश करने वाली भूख को तुरंत मिटाता है। भरपूर आयरन और खून की कमी से बचाव इसमें इस्तेमाल होने वाला गुड़ आयरन का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाकर एनीमिया (खून की कमी) को दूर करता है

खुरमी खाने के 4 मुख्य स्वास्थ्य लाभ

  • तुरंत और लंबे समय तक ऊर्जा गेहूं के आटे, सूजी और गुड़ के मेल से बने होने के कारण यह शरीर को तुरंत एनर्जी देता है और थकान को मिटाता है।
  • मजबूत हड्डियां और जोड़ों की सेहत इसमें मौजूद सफेद तिल और सूखा नारियल कैल्शियम और विटामिंस से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत और लचीला बनाते हैं।
  • बेहतर पाचन क्रिया गुड़ शरीर के पाचक एंजाइम्स को बढ़ाता है, जिससे भोजन आसानी से पचता है और पेट में कब्ज या गैस की समस्या नहीं होती।

25. मीठा बड़ा (Mitha Vada)

मीठा बड़ा बस्तर का एक पारंपरिक और स्वादिष्ट मीठा व्यंजन है, जिसे चावल के आटे, गुड़ और इलायची से बनाया जाता है। मिश्रण को छोटे-छोटे गोल आकार में बनाकर सुनहरा होने तक तला जाता है। इसका स्वाद बाहर से कुरकुरा और अंदर से मुलायम होता है। बस्तर के गांवों में यह व्यंजन विशेष रूप से त्योहारों, पूजा और पारिवारिक समारोहों में बनाया जाता है।

स्थानीय लोग इसे चाय या दूध के साथ भी खाना पसंद करते हैं। यह बस्तर की पारंपरिक मिठाइयों में प्रमुख स्थान रखता है।

स्वास्थ्य लाभ:

आयरन का अच्छा स्रोत।

शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।

पाचन में सहायक।

चावल का आटा आसानी से पच जाता है।

26. तीखुर की बर्फी (Tikhur Barfi) – पेट के लिए अमृत समान

तिखुर की बर्फी बस्तर का प्रसिद्ध पारंपरिक मिष्ठान है, जिसे तिखुर नामक औषधीय कंद से तैयार किया जाता है। इसमें तिखुर का आटा, दूध, चीनी या गुड़ और सूखे मेवे मिलाए जाते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए गर्मियों में इसका सेवन अधिक किया जाता है। बस्तर के कई ग्रामीण परिवार आज भी इसे पारंपरिक तरीके से बनाते हैं। यह स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी प्रसिद्ध है।

स्वास्थ्य लाभ:

शरीर को ठंडक पहुंचाती है।

पाचन में मदद करती है।

पेट की जलन कम करती है।

ऊर्जा बनाए रखती है।

27. महुआ लड्डू (Mahua Laddu)

महुआ लड्डू बस्तर के आदिवासी समुदाय का पारंपरिक पौष्टिक व्यंजन है। इसे सूखे महुआ फूल, गुड़ और मेवों से तैयार किया जाता है। महुआ की प्राकृतिक मिठास इसे अलग स्वाद देती है। यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और यात्रा के दौरान भी खाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह विशेष अवसरों और त्योहारों पर बनाया जाता है

स्वास्थ्य लाभ:

शरीर को भरपूर ऊर्जा देता है।

प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक।

थकान कम करने में मदद करता है।


कहाँ मिलेगा इन व्यंजनों का असली स्वाद? बस्तर के प्रसिद्ध स्थानीय बाजार (Local Haat-Bazaars)

यदि आप बस्तर के इन प्रामाणिक व्यंजनों (Authentic Cuisine) और सल्फी का असली स्वाद चखना चाहते हैं, तो आपको बस्तर के पारंपरिक ‘हाट-बाजारों’ (Weekly Markets) का रुख करना होगा। ये बाजार केवल व्यापार के केंद्र नहीं, बल्कि बस्तरिया संस्कृति के मिलन स्थल हैं

बस्तर के पारंपरिक और अनोखे व्यंजनों का असली स्वाद यहाँ लगने वाले साप्ताहिक स्थानीय हाट-बाजारों में मिलता है, जिनमें जगदलपुर हाट (रविवार), टोकपाल हाट (सोमवार), कोंडागांव हाट (रविवार), डिमरापाल (पमेला) बाजार और लोहंडीगुड़ा हाट मुख्य हैं

  1. जगदलपुर हाट – बाजार (कुम्हारपारा) : यहाँ आपको तीखुर, बोड़ा मशरूम और चापड़ा चटनी आसानी से मिल जाएगी।
  2. टोकपाल हाट-बाजार : यह बाजार विशेष रूप से ताज़ा ‘सल्फी’ और ‘लांदा’ (चावल से बनी शराब) के लिए प्रसिद्ध है।
  3. लोहंडीगुड़ा हाट : चित्रकोट जलप्रपात के पास स्थित इस बाजार में स्थानीय जंगली भाजियाँ और बास्ता बहुतायत में मिलते हैं।
  4. गीदम और बारसूर बाजार : दंतेवाड़ा जिले के इन बाजारों में आपको महुआ के लड्डू और पारंपरिक बस्तरिया आमट का प्रामाणिक स्वाद देखने को मिलेगा।

बस्तरिया खान-पान की अनूठी विशेषताएं, प्रकृति और स्वास्थ्य का मेल

बिना तेल और मसालों का जादू

पारंपरिक बस्तरिया भोजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे पकाने में तेल, रिफाइंड घी या भारी गरम मसालों का उपयोग ना के बराबर होता है। स्थानीय लोग भोजन को उबालकर (Boiling), भाप में (Steaming) या कंडे की धीमी आग पर भूनकर तैयार करते हैं। इससे भोजन के मूल पोषक तत्व पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर स्थानीय जड़ी-बूटियाँ

बस्तर के व्यंजनों में उपयोग होने वाली अधिकांश सामग्रियां जैसे जंगली पत्तियां, मशरूम और कंद-मूल औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। यह भोजन यहाँ की जनजातियों को मलेरिया, लू और पेट की बीमारियों से बचाने में प्राकृतिक ढाल का काम करता है।

निष्कर्ष
बस्तर का स्वाद क्यों है सबसे अलग ?

बस्तर का पारंपरिक खान-पान केवल व्यंजनों की सूची नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे मनुष्य प्रकृति के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाकर एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकता है। यहाँ के भोजन की सादगी, बिना मिलावट के शुद्ध अवयव और खाना पकाने के पारंपरिक तरीके इसे आज के प्रोसेस्ड फूड के दौर में एक ‘सुपरफूड’ बनाते हैं।

यदि आप छत्तीसगढ़ आ रहे हैं, तो बस्तर के इन 26 व्यंजनों का स्वाद लिए बिना आपकी यात्रा अधूरी है। यह स्वाद और संस्कृति का एक ऐसा अनोखा संगम है, जो आपकी यादों में हमेशा के लिए बस जाएगा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 क्या बस्तर की लाल चींटी की चटनी (Chapra Chutney) सचमुच सेहत के लिए फायदेमंद है ?

जी हाँ, वैज्ञानिक शोधों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, चापड़ा चटनी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, आयरन और जिंक पाया जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाती है और मलेरिया व फ्लू जैसी बीमारियों में असरदार है।

2 मड़िया पेज (Mandia Pej) को बस्तर का सुपरफूड क्यों कहा जाता है ?

मड़िया पेज रागी से बनता है, जिसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फाइबर और अमीनो एसिड होते हैं। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और गर्मियों में लू से बचाता है।

3 बोड़ा सब्जी (Boda) साल के किस महीने में मिलती है ?
बोड़ा मशरूम केवल मानसून की शुरुआत में, यानी जून और जुलाई के महीनों में बस्तर के जंगलों में मिलता है। सीजन सीमित होने के कारण यह बेहद महंगा और दुर्लभ होता है।