भारत में ऐसे अनेक मंदिर हैं जो केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि इतिहास के जीवित दस्तावेज भी हैं। कुछ मंदिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं कुछ अपनी आध्यात्मिक शक्ति के लिए और कुछ अपनी हजारों वर्षों पुरानी विरासत के कारण लोगों को आकर्षित करते हैं। छत्तीसगढ़ के राजिम में स्थित श्री राजीव लोचन मंदिर भी ऐसे ही मंदिरों में शामिल है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
कल्पना कीजिए कि सुबह का समय है। सूरज की पहली किरणें महानदी के किनारे फैली हुई धुंध को धीरे धीरे हटाने लगी हैं। मंदिर की घंटियों की आवाज वातावरण में गूंज रही है। श्रद्धालु हाथ जोड़कर मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। नदी की ठंडी हवा चेहरे को छूती है और सामने दिखाई देता है सदियों पुराना एक ऐसा मंदिर जिसने समय के अनगिनत उतार चढ़ाव देखे हैं। यही है श्री राजीव लोचन मंदिर का पहला अनुभव।
पहली बार जब कोई व्यक्ति इस मंदिर को देखता है तो उसे केवल एक धार्मिक स्थल नहीं दिखाई देता। उसे पत्थरों में उकेरी गई कला दिखाई देती है। उसे इतिहास की झलक दिखाई देती है। उसे यह एहसास होता है कि वह किसी साधारण मंदिर के सामने नहीं बल्कि ऐसे स्मारक के सामने खड़ा है जिसने एक हजार वर्ष से भी अधिक समय का सफर तय किया है।
राजिम को अक्सर छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है क्योंकि यहां महानदी पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है। इसी पवित्र संगम के निकट स्थित है श्री Rajiv Lochan Temple जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत के प्रमुख वैष्णव तीर्थों में गिना जाता है।
आज के समय में जब बहुत से लोग केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं तब राजीव लोचन मंदिर जैसे स्थान हमें भारत की वास्तविक सांस्कृतिक गहराई से परिचित कराते हैं। यहां आने वाला व्यक्ति केवल दर्शन करके वापस नहीं लौटता बल्कि इतिहास कला और आध्यात्मिकता के एक अद्भुत संगम का अनुभव लेकर जाता है।
मुझे हमेशा ऐसे धार्मिक स्थल आकर्षित करते हैं जहां केवल श्रद्धा ही नहीं बल्कि इतिहास भी मौजूद हो। राजीव लोचन मंदिर उन्हीं स्थानों में से एक है। यहां खड़े होकर व्यक्ति केवल भगवान के सामने नहीं बल्कि इतिहास के सामने भी खड़ा होता है।
सबसे रोचक बात यह है कि यह मंदिर आज भी उतना ही जीवंत है जितना सदियों पहले रहा होगा। यहां पूजा भी होती है। त्योहार भी मनाए जाते हैं। श्रद्धालु भी आते हैं और शोधकर्ता भी। यही विशेषता इसे एक साधारण मंदिर से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना देती है।
अगर आप धार्मिक यात्रा पसंद करते हैं तो यह स्थान आपके लिए विशेष है। अगर आपको इतिहास पसंद है तब भी यह स्थान आपके लिए महत्वपूर्ण है। अगर आपको भारतीय वास्तुकला में रुचि है तब भी यह मंदिर आपको प्रभावित करेगा।
यही कारण है कि श्री राजीव लोचन मंदिर केवल राजिम का नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव माना जाता है।
श्री राजीव लोचन मंदिर का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व क्या है
किसी भी प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी शक्ति उसका इतिहास होता है और राजीव लोचन मंदिर का इतिहास अत्यंत समृद्ध माना जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर लगभग सातवीं से आठवीं शताब्दी के बीच का माना जाता है। मंदिर में प्राप्त शिलालेखों से पता चलता है कि इसका संबंध नल वंश के शासक विलासतुंग से जोड़ा जाता है। कुछ विद्वान मंदिर के कुछ हिस्सों को इससे भी अधिक प्राचीन मानते हैं।
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जब हम यह सोचते हैं कि आज से लगभग तेरह सौ वर्ष पहले इस मंदिर का निर्माण हुआ होगा तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है। उस समय न आधुनिक मशीनें थीं और न ही आज जैसी तकनीक। इसके बावजूद इतनी भव्य संरचना का निर्माण किया गया जो आज भी लोगों को आकर्षित करती है।
राजीव लोचन नाम का अर्थ है कमल जैसे नेत्रों वाले भगवान विष्णु। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की चार भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है जिसे राजीव लोचन स्वरूप कहा जाता है। यही इस मंदिर की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान है।
राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। जिस प्रकार उत्तर भारत में प्रयागराज का महत्व है उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में राजिम का धार्मिक महत्व माना जाता है। यहां तीन नदियों का संगम होने के कारण यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही तीर्थ स्थल के रूप में विकसित हुआ।
राजिम कुंभ का आयोजन भी इसी क्षेत्र की धार्मिक पहचान को और मजबूत करता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में साधु संत श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इस दौरान पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण से भर जाता है।
इतिहास के साथ साथ इस मंदिर का सांस्कृतिक महत्व भी बहुत बड़ा है। यह केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का जीवित प्रतीक है। यहां आने वाले लोग केवल दर्शन नहीं करते बल्कि राज्य की प्राचीन कला और स्थापत्य परंपरा को भी देखते हैं।
श्री राजीव लोचन मंदिर तक कैसे पहुंचें और यात्रा की तैयारी कैसे करें
राजीव लोचन मंदिर छत्तीसगढ़ के राजिम नगर में स्थित है। यह स्थान रायपुर से लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित माना जाता है जिससे यहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।

हवाई मार्ग – अगर आप हवाई मार्ग से आ रहे हैं तो निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा रायपुर में स्थित है। रायपुर पहुंचने के बाद सड़क मार्ग द्वारा राजिम आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग – से आने वाले यात्रियों के लिए रायपुर प्रमुख रेलवे स्टेशन माना जाता है। वहां से टैक्सी बस या निजी वाहन के माध्यम से राजिम पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग – से यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह मार्ग काफी आरामदायक माना जाता है। रास्ते में छत्तीसगढ़ का ग्रामीण वातावरण और प्राकृतिक दृश्य यात्रा को और अधिक सुखद बना देते हैं।
मंदिर दर्शन के लिए सुबह का समय विशेष रूप से अच्छा माना जाता है। इस समय भीड़ अपेक्षाकृत कम रहती है और वातावरण अधिक शांत महसूस होता है।
अगर आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं तो कैमरा अवश्य साथ रखें क्योंकि मंदिर की वास्तुकला और आसपास का नदी क्षेत्र अत्यंत आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करता है।
आरामदायक कपड़े पहनना और गर्मियों में पर्याप्त पानी साथ रखना भी उपयोगी रहता है।
श्री राजीव लोचन मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है
किसी भी धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल का अनुभव मौसम के अनुसार बदल जाता है। श्री Rajiv Lochan Temple भी ऐसा ही स्थान है जहां अलग अलग मौसम में अलग अनुभव मिलता है। अगर आप इस मंदिर की आध्यात्मिक शांति को पूरी तरह महसूस करना चाहते हैं तो अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है।
सर्दियों के दौरान सुबह की हल्की ठंड और मंदिर परिसर का शांत वातावरण दर्शन को और अधिक सुखद बना देता है। इस समय श्रद्धालुओं की संख्या भी अच्छी रहती है लेकिन अत्यधिक गर्मी नहीं होती जिससे लंबे समय तक परिसर में समय बिताना आसान हो जाता है।
अगर आप राजिम कुंभ के दौरान यहां आते हैं तो अनुभव पूरी तरह अलग हो सकता है। उस समय लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। साधु संतों की उपस्थिति धार्मिक आयोजन और नदी संगम का वातावरण पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।
गर्मियों में भी मंदिर दर्शन किए जा सकते हैं लेकिन दोपहर के समय तापमान अधिक होने के कारण सुबह और शाम का समय अधिक उपयुक्त माना जाता है।
मानसून के दौरान संगम क्षेत्र और आसपास की हरियाली बहुत सुंदर दिखाई देती है। हालांकि इस समय यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेना बेहतर होता है।
श्री राजीव लोचन मंदिर यात्रा का संभावित बजट
राजिम की यात्रा बहुत अधिक महंगी नहीं मानी जाती। सही योजना के साथ कम बजट में भी शानदार धार्मिक यात्रा की जा सकती है।
| यात्रा प्रकार | प्रतिदिन अनुमानित खर्च |
|---|---|
| साधारण बजट यात्रा | ₹1000 से ₹2500 |
| मिड रेंज यात्रा | ₹3000 से ₹6000 |
| आरामदायक यात्रा | ₹7000 से ₹12000 या अधिक |
अगर आप रायपुर से एक दिन की यात्रा के रूप में आते हैं तो खर्च और भी कम हो सकता है।
श्री राजीव लोचन मंदिर की वास्तुकला इतनी विशेष क्यों मानी जाती है
मंदिर का सबसे आकर्षक पहलू इसकी वास्तुकला है। जब कोई व्यक्ति पहली बार मंदिर को देखता है तो उसे तुरंत एहसास हो जाता है कि यह कोई साधारण धार्मिक संरचना नहीं है।
मंदिर पत्थरों से निर्मित है और इसकी संरचना प्राचीन भारतीय मंदिर वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। मुख्य मंडप को सहारा देने वाले स्तंभों पर अत्यंत सुंदर नक्काशी की गई है।
इन स्तंभों को ध्यान से देखने पर विभिन्न देवी देवताओं यक्ष गंधर्व और पौराणिक आकृतियों की कलात्मक प्रस्तुति दिखाई देती है। कई विद्वान मानते हैं कि यह मंदिर उस समय के शिल्प कौशल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
मंदिर के भीतर प्रवेश करते समय ऐसा महसूस होता है जैसे आप केवल एक धार्मिक स्थल में नहीं बल्कि एक जीवित संग्रहालय में प्रवेश कर रहे हों।
भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा का महत्व
मंदिर का केंद्र बिंदु भगवान विष्णु की चार भुजाओं वाली प्रतिमा है जिसे राजीव लोचन स्वरूप कहा जाता है।
यह प्रतिमा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि कलात्मक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। भगवान के नेत्र कमल की पंखुड़ियों की तरह सुंदर माने जाते हैं और इसी कारण उन्हें राजीव लोचन कहा गया।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से मन को शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
मंदिर के गर्भगृह में पहुंचने के बाद वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। बाहर की दुनिया का शोर जैसे धीरे धीरे समाप्त होने लगता है और मन केवल दर्शन पर केंद्रित हो जाता है।
मंदिर के आसपास कौन कौन सी जगहें देखनी चाहिए
1 त्रिवेणी संगम
राजिम का सबसे बड़ा आकर्षण केवल मंदिर नहीं बल्कि महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम भी है।
जब आप संगम तट पर खड़े होते हैं तो पानी की धाराओं को मिलते हुए देखना अपने आप में एक विशेष अनुभव बन जाता है। कई श्रद्धालु यहां स्नान भी करते हैं।
2 कुलेश्वर महादेव मंदिर
संगम क्षेत्र के निकट स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। धार्मिक दृष्टि से इसका भी विशेष महत्व माना जाता है।
3 राजिम कुंभ क्षेत्र
अगर आप कुंभ आयोजन के समय यहां आते हैं तो पूरा क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बन जाता है। यह अनुभव जीवन भर याद रह सकता है।
4 नदी तट
शाम के समय नदी किनारे बैठना और सूर्यास्त देखना अत्यंत सुखद अनुभव माना जाता है। कई लोग केवल इस शांति का अनुभव करने के लिए भी यहां समय बिताते हैं।
स्थानीय भोजन और संस्कृति का अनुभव
राजिम केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति को समझने का भी एक माध्यम है।
यहां आने पर आपको स्थानीय भोजन का स्वाद अवश्य लेना चाहिए। चावल आधारित व्यंजन यहां के खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
त्योहारों और मेलों के दौरान स्थानीय संस्कृति अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। लोकगीत लोकनृत्य और पारंपरिक जीवन शैली यहां की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखते हैं।
स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर आपको कई ऐसी कहानियां और मान्यताएं सुनने को मिल सकती हैं जो किसी पुस्तक में नहीं मिलतीं।
तीन दिन की यात्रा योजना
पहले दिन राजिम पहुंचें और श्री राजीव लोचन मंदिर के दर्शन करें। इसके बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को विस्तार से देखें।
दूसरे दिन त्रिवेणी संगम और कुलेश्वर महादेव मंदिर का भ्रमण करें। शाम नदी तट पर बिताएं।
तीसरे दिन स्थानीय संस्कृति और बाजारों को समझें और फिर वापसी की तैयारी करें।
सात दिन की विस्तृत यात्रा योजना
पहला दिन यात्रा और विश्राम के लिए रखें।
दूसरा दिन राजीव लोचन मंदिर को समर्पित करें।
तीसरा दिन संगम क्षेत्र और आसपास के धार्मिक स्थलों को देखें।
चौथा दिन स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन को समझने में बिताएं।
पांचवां दिन फोटोग्राफी और आध्यात्मिक अनुभव के लिए रखें।
छठा दिन आसपास के अन्य धार्मिक स्थलों का भ्रमण करें।
सातवां दिन यात्रा के अनुभवों को समेटते हुए शांत वातावरण में समय बिताएं।
जिम्मेदार और सतत धार्मिक पर्यटन
धार्मिक स्थलों की यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी भी होती है कि वे मंदिर की गरिमा बनाए रखें।
मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है। प्लास्टिक और कचरा इधर उधर नहीं फेंकना चाहिए।
फोटोग्राफी करते समय स्थानीय नियमों का पालन करना चाहिए।
अन्य श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है जितना स्वयं दर्शन करना।
सुरक्षा और उपयोगी सुझाव
गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी साथ रखें।
भीड़भाड़ वाले अवसरों पर अपने सामान का ध्यान रखें।
मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखें।
बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो भीड़ के दौरान विशेष सावधानी रखें।
धार्मिक आयोजनों के समय होटल पहले से बुक कर लेना बेहतर रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री राजीव लोचन मंदिर को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में क्यों गिना जाता है
यह मंदिर केवल धार्मिक महत्व के कारण प्रसिद्ध नहीं है बल्कि इसका ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व भी अत्यंत बड़ा है। लगभग तेरह सौ वर्ष पुरानी परंपरा से जुड़ा यह मंदिर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आस्था और इतिहास दोनों का अनुभव एक साथ मिलता है।
2. क्या यह मंदिर केवल भगवान विष्णु के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है
नहीं। यद्यपि यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है लेकिन यहां आने वाले लोगों में केवल वैष्णव परंपरा के श्रद्धालु ही नहीं होते। इतिहास प्रेमी शोधकर्ता वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोग और सामान्य पर्यटक भी यहां बड़ी संख्या में आते हैं।
3. क्या परिवार के साथ यहां आना अच्छा अनुभव हो सकता है
यह स्थान परिवारों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यहां धार्मिक वातावरण के साथ साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी है जिससे सभी आयु वर्ग के लोगों को कुछ न कुछ सीखने और देखने को मिलता है।
4. क्या यहां एक दिन में यात्रा पूरी की जा सकती है
हां लेकिन अगर आप मंदिर की वास्तुकला संगम क्षेत्र और आसपास के धार्मिक स्थलों को विस्तार से देखना चाहते हैं तो कम से कम दो या तीन दिन का समय देना बेहतर रहेगा।
5. मंदिर की सबसे विशेष बात क्या मानी जाती है
भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा और मंदिर के स्तंभों पर की गई नक्काशी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में गिनी जाती हैं। इन्हें देखकर उस समय के कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा का अनुमान लगाया जा सकता है।
6. क्या यहां बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए यात्रा आसान रहती है
सामान्य परिस्थितियों में यहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इसलिए बुजुर्ग श्रद्धालु भी आराम से दर्शन कर सकते हैं।
7. क्या मंदिर में फोटोग्राफी की अनुमति होती है
कुछ क्षेत्रों में फोटोग्राफी की अनुमति हो सकती है लेकिन हमेशा स्थानीय नियमों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
8. क्या यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं
हां। राजिम कुंभ और अन्य धार्मिक अवसरों के दौरान यहां विशेष आयोजन होते हैं जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
9. क्या मंदिर परिसर में पर्याप्त समय बिताना चाहिए
बिल्कुल। यह ऐसा मंदिर नहीं है जहां केवल कुछ मिनट दर्शन करके लौट जाना चाहिए। यहां की वास्तुकला और वातावरण को समझने के लिए समय देना चाहिए।
10. क्या पहली बार छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक को यह मंदिर अवश्य देखना चाहिए
यदि कोई व्यक्ति छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को समझना चाहता है तो यह मंदिर उसकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।
निष्कर्ष
श्री राजीव लोचन मंदिर केवल पत्थरों से बना हुआ एक प्राचीन मंदिर नहीं है। यह छत्तीसगढ़ की आस्था इतिहास संस्कृति और कला का जीवित प्रतीक है। यहां आने वाला व्यक्ति केवल भगवान विष्णु के दर्शन नहीं करता बल्कि वह उस विरासत से भी जुड़ता है जिसने सदियों तक इस क्षेत्र की पहचान को जीवित रखा है।
जब आप मंदिर के प्राचीन स्तंभों को देखते हैं तो महसूस होता है कि समय बदल सकता है लेकिन सच्ची कला और सच्ची आस्था कभी समाप्त नहीं होती। यही कारण है कि आज भी हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं और वही श्रद्धा महसूस करते हैं जो शायद सदियों पहले आने वाले लोगों ने महसूस की होगी।
राजिम का संगम क्षेत्र मंदिर की आध्यात्मिकता को और अधिक गहरा बना देता है। नदी की शांत धारा मंदिर की घंटियों की आवाज और श्रद्धालुओं की आस्था मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जिसे केवल शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना कठिन है।
अगर आप धार्मिक यात्रा करना चाहते हैं तो यह स्थान आपके लिए महत्वपूर्ण है। अगर आप इतिहास समझना चाहते हैं तो भी यह उतना ही महत्वपूर्ण है। और अगर आप जीवन की भागदौड़ से कुछ समय के लिए दूर जाकर शांति महसूस करना चाहते हैं तो भी यह स्थान आपको निराश नहीं करेगा।
मेरा अनुभव
श्री राजीव लोचन मंदिर के बारे में जितना अधिक पढ़ता हूं उतना अधिक यह महसूस होता है कि यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि समय की एक यात्रा है। मेरे लिए इस स्थान की सबसे बड़ी खूबी इसकी प्राचीनता नहीं बल्कि उसकी जीवंतता है।
कल्पना कीजिए कि आप सुबह के समय मंदिर परिसर में प्रवेश कर रहे हैं। सामने प्राचीन स्तंभ खड़े हैं। मंदिर की घंटियां बज रही हैं। श्रद्धालु शांत भाव से दर्शन कर रहे हैं। उस समय शायद मन अपने आप शांत होने लगता है।
मुझे लगता है कि अगर मैं वहां खड़ा होता तो केवल दर्शन करके तुरंत वापस नहीं लौटता। मैं कुछ समय मंदिर के स्तंभों को देखता। उन नक्काशियों को समझने की कोशिश करता जिन्हें किसी कलाकार ने सदियों पहले पत्थर में उकेरा होगा।
इसके बाद शायद मैं संगम तट पर जाकर बैठता और बहते हुए जल को देखता। कई बार जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब व्यक्ति को किसी बड़े उत्तर की आवश्यकता नहीं होती। उसे केवल कुछ समय की शांति चाहिए होती है। मुझे लगता है कि राजीव लोचन मंदिर ऐसा ही अनुभव दे सकता है।
यही कारण है कि मेरे लिए यह स्थान केवल एक पर्यटन स्थल या धार्मिक केंद्र नहीं बल्कि ऐसा स्थान है जहां इतिहास आस्था और आत्मिक शांति एक साथ मिल जाते हैं।